'वोट चोरी' से लेकर घर नं. 0 तक: 12 कोट्स में जानें चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों पर दिया क्या जवाब

Published : Aug 17, 2025, 07:35 PM IST
Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar

सार

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी के आरोपों का खंडन किया। बोले, चुनाव आयोग सबके लिए समान है, SIR में सभी दल शामिल हैं। बिना सबूत आरोप लगाना संविधान और लोकतंत्र का अपमान है।

Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों का खंडन किया जिनमें बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( Bihar SIR) के जरिए "वोट चोरी" की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग का न तो कोई विरोधी है और न समर्थक। सभी राजनीतिक दल समान हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस की 12 मुख्य बातें

1- कानून के अनुसार, हर राजनीतिक दल का जन्म चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन के माध्यम से होता है। चुनाव आयोग उन दलों के बीच भेदभाव कैसे कर सकता है? चुनाव आयोग के लिए कोई सत्ता पक्ष या विपक्ष नहीं। सभी समान हैं।

2-जीरो नंबर! इस देश में करोड़ों लोगों के पते के आगे "जीरो नंबर" लगा है? क्यों? क्योंकि पंचायत या नगरपालिका ने उनके घर को कोई नंबर नहीं दिया है। बेघर लोगों को भी वोट देने का अधिकार है। ऐसे मामले में घर संख्या के आगे 0 लिखा आता है।

3- कुछ मतदाताओं ने दोहरे मतदान का आरोप लगाया। जब सबूत मांगा गया तो जवाब नहीं। ऐसे झूठे आरोपों से न तो चुनाव आयोग डरता है और न मतदाता। चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति की जा रही है।

4- पिछले दो दशकों से लगभग सभी दल मतदाता सूची में सुधार की मांग कर रहे हैं। इसे पूरा करने के लिए चुनाव आयोग ने बिहार से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत की है।

5- SIR में सभी मतदाताओं ने विभिन्न दलों द्वारा नामित 1.6 लाख बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) के साथ मिलकर संयुक्त रूप से एक ड्राफ्ट रोल तैयार किया है।

6- जमीनी स्तर पर, सभी मतदाता, राजनीतिक दल और बीएलओ मिलकर पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं। वे प्रमाणीकरण और साइन कर रहे हैं। वीडियो प्रशंसापत्र (video testimonials) दे रहे हैं। चिंता की बात है कि ये दस्तावेज और जिला-स्तरीय पार्टी अध्यक्षों और उनके द्वारा मनोनीत बीएलए की आवाजें या तो उनके राज्य या राष्ट्रीय स्तर के नेताओं तक नहीं पहुंच रही हैं या जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा।

7- 7 करोड़ से अधिक मतदाता (बिहार में) चुनाव आयोग के साथ खड़े हैं। ऐसे में चुनाव आयोग और मतदाताओं की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

8- कई मतदाताओं की तस्वीरें बिना उनकी अनुमति के मीडिया के सामने पेश की गईं। उन पर आरोप लगाए गए। क्या चुनाव आयोग को किसी भी मतदाता, चाहे वह मां हो, बहू हो, बेटी हो, के सीसीटीवी वीडियो शेयर करने चाहिए?

9- लोकसभा चुनाव में 10 लाख से ज्यादा बूथ लेवल एजेंट और उम्मीदवारों के 20 लाख से ज्यादा पोलिंग एजेंट काम करते हैं। इतने सारे लोगों के सामने, इतनी पारदर्शी प्रक्रिया में, क्या कोई मतदाता वोट चुरा सकता है?

यह भी पढ़ें- '7 दिन में हलफनामा दो, नहीं तो देश से माफी मांगो', राहुल गांधी पर चुनाव आयोग का सबसे बड़ा हमला

10- रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नतीजे घोषित करने के बाद 45 दिन में राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट जाकर चुनाव को चुनौती दे सकते हैं। चुनाव के बाद 45 दिन में किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को कोई अनियमितता नहीं मिली। आज इतने दिनों बाद बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। जनता इसके पीछे की मंशा जानती है।

11- मशीन से पढ़ने लायक मतदाता सूची पर रोक है। चुनाव आयोग ने ऐसा सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2019 में दिए गए फैसले के बाद किया है।

12- पिछले 20 सालों में एसआईआर (SIR) नहीं की गई है। देश में यह प्रक्रिया 10 से ज्यादा बार की जा चुकी है। SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची का शुद्धिकरण करना है। राजनीतिक दलों से शिकायतें मिलने के बाद SIR की जा रही है।

यह भी पढ़ें- 'कुछ नेता हमारे कंधे पर बंदूक रख राजनीति कर रहे', वोट चोरी के आरोपों पर चुनाव आयोग

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Read more Articles on

Recommended Stories

दिल्ली मेट्रो का बड़ा बदलाव: इन 10 स्टेशनों पर मिलेगी बाइक टैक्सी, ऑटो और कैब
निशा वर्मा कौन हैं? पुरुष प्रेग्नेंसी पर उनका जवाब क्यों हो रहा वायरल?