
नई दिल्ली। भारत की गिनती दुनिया के सबसे बड़े हथियारों के खरीददार के रूप में होती है। लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, युद्धपोत से लेकर राफइल तक भारत को रूस, अमेरिका, फ्रांस और इजराइल जैसे देशों से खरीदना पड़ता है। हालांकि धीरे-धीरे स्थिति बदल रही है। भारत अब दुनिया में हथियारों के खरीददार के साथ ही निर्यातक (Defence Exporter) के रूप में भी उभर रहा है। मिसाइल, हेलिकॉप्टर और हल्के लड़ाकू विमान के मामले में भारत द्वारा बनाए गए हथियार वैश्विक मंडी में दूसरे देशों के हथियारों को टक्कर दे रहे हैं।
3 हजार करोड़ के सौदे पर हो रही बात
हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा बनाया गया ध्रुव हेलिकॉप्टर भारतीय सेना और वायु सेना की जरूरतों को पूरा कर रहा है। इसके साथ ही दूसरे देशों की सेनाएं भी इसे खरीदना चाहती है। HAL की बातचीत फिलीपींस के साथ 7 ध्रुव एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (Dhruv ALH) और 8 डॉर्नियर 228 विमानों के लिए हो रही है। यह सौदा 3 हजार करोड़ रुपए का है।
फिलीपींस HAL से ध्रुव हेलिकॉप्टर का समुद्री वर्जन खरीदना चाहता है। इसे भारतीय नौ सेना और कोस्टल गार्ड की मांग पर बनाया गया था। अगर यह सौदा तय होता है तो भारत का अब तक का सबसे बड़ा हथियार निर्यात होगा। भारत के बाहर ध्रुव हेलिकॉप्टर और डॉर्नियर विमान अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो इसका निर्यात और बढ़ेगा।
फिलीपींस से साथ हेलिकॉप्टर खरीद के सौदे में ध्रुव की टक्कर एयरबस कंपनी के हेलिकॉप्टर पैंथर AS565 से हो रही है। HAL के चेयरमैन आर माधवन ने कहा है कि दोनों हेलिकॉप्टर की कीमत आसपास है। हम बेहतर सपोर्ट पैकेज ऑफर कर रहे हैं। हम फिलीपींस को अपना रखरखाव, मरम्मत और संचालन करने का विकल्प भी देंगे।
110 करोड़ रुपए है ध्रुव MR की कीमत
बता दें कि ध्रुव हेलिकॉप्टर जैसे-जैसे उन्नत हुआ है उसकी कीमत में भी वृद्धि हुई है। ध्रुव के पहले वर्जन मार्क वन की कीमत 45-50 करोड़ रुपए थी। ध्रुव मार्क तीन की कीमत 70 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसमें ग्लास कॉकपिट और एंटी वाइब्रेशन डेम्पर्स लगे हैं।
समुद्री इस्तेमाल के लिए बने ध्रुव MR में 40 करोड़ रुपए के अतिरिक्त उपकरण लगे हैं। इसके चलते इसकी कीमत 110 करोड़ रुपए है। ध्रुव एमआर में 6 से 7 करोड़ रुपए का ऑन बोर्ड वेदर राडार, 5-6 करोड़ रुपए का इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पॉड, एक करोड़ रुपए का सर्चलाइट, एक ट्रैकर बीम, इमरजेंसी फ्लोटिंग गियर और वेरी हाई फ्रिक्वेंसी होमिंग डिवाइस जैसे उपकरण लगे हैं।
वर्तमान में 320 ध्रुव हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल भारतीय सेना कर रही है। मालदीव, मॉरिशस, नेपाल और फिलीपींस कम संख्या में ध्रुव एएलएच का इस्तेमाल कर रहे हैं। फिलीपींस ने अब अधिक संख्या में ध्रुव हेलिकॉप्टर खरीदने की इच्छा जताई है। इसी तरह म्यानमार ने भी इस हेलिकॉप्टर में रूची दिखाई है। ध्रुव के करीब 50-55 उपकरण भारत द्वारा खुद विकसित किए गए हैं। बाकी के हिस्से ब्रिटेन, इजराइल और फ्रांस से लिए गए हैं। हेलिकॉप्टर के निर्यात के लिए इन देशों से भी अनुमति लेनी पड़ती है। कई बार ये देश म्यानमार जैसे देशों को हथियार निर्यात करने पर आपत्ति जताते हैं।
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