आर्टिकल 370 हटाने के सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 14 नवंबर से

Published : Oct 01, 2019, 05:53 PM IST
आर्टिकल 370 हटाने के सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 14 नवंबर से

सार

जस्टिस एन. वी. रमणा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने आर्टिकल 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त करने के फैसले संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केन्द्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया। 

नई दिल्ली (New Delhi). सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के आर्टिकल 370 के अधिकतर प्रावधान खत्म करने के केन्द्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 14 नवंबर से सुनवाई की जाएगी।

जस्टिस एन वी रमणा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने आर्टिकल 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त करने के फैसले संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केन्द्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया। बेंच ने याचिकाकर्ताओं का यह अनुरोध ठुकरा दिया कि केन्द्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते से अधिक समय नहीं दिया जाए। बेंच ने कहा कि केन्द्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को इन याचिकाओं पर अपने हलफनामे दाखिल करने के लिए ‘समुचित समय’ देना होगा क्योंकि यह जरूरी है कि सुनवाई शुरू होने से पहले सारी औपचारिकताएं पूरी की जाएं। बेंच ने कहा कि केन्द्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल होने के बाद याचिकाकर्ताओं को एक हफ्ते के भीतर इनका जवाब देना होगा।

केन्द्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को जवाब दाखिल करने की अनुमति देनी होगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘‘हमें केन्द्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति देनी होगी, अन्यथा हम इस मामले का फैसला नहीं कर सकते हैं।’’ बेंच ने आर्टिकल 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त करने के मामले में अब और कोई नई याचिका दायर करने पर भी रोक लगा दी। संविधान बेंच के अन्य सदस्यों में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस सूर्य कांत शामिल हैं। बेंच ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से कहा, ‘‘हमने उन्हें (केन्द्र और जम्मू-कश्मीर) को जवाब दाखिल करने के लिये समुचित वक्त दिया है।’’ याचिकाकर्ताओं के वकील केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल द्वारा जवाब दाखिल करने के लिये चार हफ्ते का समय देने के अनुरोध का विरोध कर रहे थे। बेंच ने कहा कि यह सोचना ही अनुचित होगा कि 31 अक्टूबर से पहले कोई फैसला या आदेश दिया जाएगा।

मांगा चार हफ्तों का वक्त
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि नए कानून के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य 31 अक्टूबर को दो केन्द्र शासित राज्यों में तब्दील हो जाएगा और इसलिए इन याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई करने तथा इस दौरान यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देने की आवश्यकता है। केन्द्र की ओर से वेणुगोपाल और जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इन 10 याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें चार हफ्ते का वक्त चाहिए क्योंकि प्रत्येक याचिका में अलग अलग दलीलें दी गई हैं। एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचन्द्रन ने जब वेणुगोपाल और मेहता के कथन पर आपत्ति की तो बेंच ने कहा, ‘‘इस तरह के मामले में हम जवाबी हलफनामे के बगैर कैसे आगे बढ़ सकते हैं?’’ बेंच ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि केन्द्र और जम्मू-कश्मीर को 28 अगस्त की सुनवाई के आलोक में अपने जवाब दाखिल करने चाहिए थे। बेंच ने कहा, ‘‘हमें सरकार को जवाब दाखिल करने की अनुमति देनी ही होगी।’’

याचिकाकर्ताओं के वकील ने जब इस बात पर जोर दिया कि केन्द्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के पास जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय था, तो बेंच ने कहा इन मामलों में जवाबी हलफनामे के बगैर हम आगे नहीं बढ़ सकेंगे। बेंच ने केन्द्र और जम्मू-कश्मीर के जवाब का इंतजार करने पर जोर देते हुए कहा, ‘‘यदि याचिका स्वीकार हो गई, तो क्या हम पहले की स्थिति बहाल नहीं कर सकते?’’ इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के पांच अगस्त के केन्द्र के फैसले से पहले ही दायर की गई याचिकाओं का मुद्दा उठा। कुछ याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने तो आर्टिकल 370 के प्रावधानों और आर्टिकल 35-ए की संवैधानिकता को पहले ही चुनौती दे रखी है।

सबसे पहली याचिका दायर करने वाले मनोहर शर्मा को कोर्ट ने लताड़ा
बेंच ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) सूर्य प्रताप सिंह को बुलाया और इस विषय पर लंबित याचिकाओं की जानकारी प्राप्त करके न्यायालय को सूचित करने का निर्देश दिया। इस मामले में जब कुछ वकीलों ने हस्तक्षेप करने की अनुमति मांगी तो बेंच ने कहा, ‘‘यदि हर कोई याचिका दायर करना चाहेगा तो यहां एक लाख याचिकाएं हो जायेंगी। इससे तो काम नहीं चलेगा। कृपया ऐसा नहीं करें। यह अनावश्यक रूप से मामले में विलंब ही पैदा करेगा।’’ बेंच ने केन्द्र के फैसले के एक दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा को भी आड़े हाथ लिया और कहा कि उनकी याचिका में कोई भी आधार या ठोस तथ्य नहीं हैं। बेंच ने शर्मा से कहा, ‘‘आपने सबसे पहले आने वाला खेल खेला है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको पहले सुना जाएगा। निश्चित ही आपकी याचिका में कुछ भी नहीं है और केन्द्र का फैसला होने के 72 घंटे के भीतर ही आप न्यायालय आ गए तो इसका मतलब यह नहीं है कि हमें पहले आपको सुनना होगा।’’

कई लोगों ने की थी याचिका दायर
नेशनल कांफ्रेन्स, सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली जेएंडके पीपुल्स कांफ्रेन्स और माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने केन्द्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकायें दायर की हैं। नेशनल कांफ्रेन्स की ओर से सांसद मोहम्मद अकबर लोन और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी ने याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति मसूदी ने ही 2015 में एक फैसले में कहा था कि आर्टिकल 370 संविधान का स्थाई हिस्सा है। इसके अलावा, पूर्व रक्षा अधिकारियों और नौकरशाहों के समूह ने भी याचिका दायर की है। इनमे प्रोफेसर राधा कुमार, पूर्व आईएएस अधिकारी हिन्दल हैदर तैयबजी, पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक, सेवानिवृत्त मेजर जनरल अशोक कुमार मेहता, पंजाब काडर के पूर्व आईएएस अधिकारी अमिताभ पांडे और केरल काडर के पूर्व आईएएस अधिकारी गोपाल पिल्लै शामिल हैं। इनके अलावा, आईएएस की नौकरी छोड़ कर राजनीति में आये शाह फैसल और उनकी पार्टी की सहयोगी शहला रशीद ने भी याचिका दायर की है।
 

[यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है]

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

45 लाख के गहने देख भी नहीं डोला मन, सफाईकर्मी की ईमानदारी देख सीएम ने दिया इनाम
बाइक पर पत्नी ने 27 सेकेंड में पति को जड़े 14 थप्पड़, देखें Viral Video