
नई दिल्ली. किसी गरीब के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम मुश्किल हो, उसके लिए हर हफ्ते 7200 रुपए जुटा पाना कैसे संभव होता? यह मामला एक ऐसे पिता से जुड़ा है, जिसकी 4 साल की बेटी दिल की गंभीर बीमार से जूझ रही है। डॉक्टरों ने उसे जो दवाइयां लिखीं, उन्हें खरीद पाना पिता के लिए नामुमकिन था। वो रिक्शा चलाकर बमुश्किल रोज 200-300 रुपए कमा पाता है। ऐसे में जब उसे कुछ नहीं सूझा, तो उसने लोगों से मदद मांगी। इस संबंध में हाईकोर्ट में एक याचिका डाली गई। आखिर में हाईकोर्ट ने सरकार से बच्ची के इलाज के लिए दवाइयां उपलब्ध कराने को कहा है।
करीब छह हफ्ते लगेगी महंगी वैक्सीन
हाईकोर्ट ने 4 साल की सरिया सिद्दीकी का इलाज फ्री कराने का फैसला दिया है। बुधवार को कोर्ट ने इस संबंध में सरकार को निर्देशित किया। सरकारी अस्पताल जीबी पंत ने बच्ची के इलाज के लिए बी मेनिंगो और न्यूमोकोकल वैक्सीन नाम की दो दवाइयां लिखी थी। जब पिता ने मेडिकल स्टोर पर जाकर दवाइयों की कीमत पूछी, तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट भरने वाला आदमी महंगी दवाइयां कैसे खरीद पाता? इनका छह महीने का खर्चा करीब 43 हजार रुपए आ रहा था।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला..
बच्ची के पिता की मदद के लिए वकील अशोक अग्रवाल और कुमार उत्कर्ष आगे आए। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें कहा गया कि बच्ची का पिता रिक्शा चलाता है। वो इतनी महंगी दवाइयां नहीं खरीद सकता। इस पर जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने सरकार को निर्देश दिया है वो बच्ची के इलाज के लिए ये दवाइयां मुहैया कराए। बच्ची के दिल में छेद है। उसे जीबी पंत अस्पताल, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय और राम मनोहर लोहिया अस्पताल ने सर्जरी कराने की सलाह दी है।
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