
चेन्नई। IIT मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटि (V Kamakoti) गौ मूत्र पर दिए अपने बयानों के चलते विवादों में घिर गए हैं। उन्होंने गौ मूत्र के औषधीय महत्व पर बात की। बताया कि यह रोगों को दूर करने के मामले में कितना उपयोगी है। उनकी बातें कुछ लोगों को पसंद नहीं आईं हैं। कामकोटि ने गाय की भारतीय नस्लों को बचाने और जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की।
कामकोटि ने बताया कि गौ मूत्र में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। इससे पाचन संबंधी परेशानियों में लाभ मिलता है। वायरल हुए एक वीडियो में कामकोटि ने एक तपस्वी के जीवन का किस्सा सुनाया। कहा कि संन्यासी ने गोमूत्र पीने के बाद अपने तेज बुखार से खुद को ठीक कर लिया था।
कामकोटि ने कहा, "एक तपस्वी को तेज बुखार था। वह डॉक्टर को बुलाने की सोच रहा था। मैं उस संन्यासी का नाम भूल गया हूं, लेकिन उसने कहा था 'गोमूत्रन पिनमि'। उसने गौ मूत्र पी लिया, इसके 15 मिनट में उसका बुखार उतर गया।"
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उन्होंने कहा कि गौ मूत्र से इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी बीमारी का इलाज हो सकता है। 15 जनवरी को चेन्नई में माटू पोंगल पर आयोजित 'गौ संरक्षण शाला' में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने जैविक खेती के महत्व और कृषि तथा समग्र अर्थव्यवस्था में देशी गायों की महत्वपूर्ण भूमिका की बातें बताईं। बता दें कि माटू पोंगल (तमिल माह थाई का दूसरा दिन) गायों और बैलों को समर्पित त्यौहार है। इस दिन लोग गाय की पूजा करते हैं।
कामकोटि के गौ मूत्र संबंधी बयान पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कामकोटि की बातों को लेकर कहा कि केंद्र सरकार की मंशा देश में शिक्षा को 'खराब' करना है। कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने कहा कि आईआईटी मद्रास के निदेशक अपने संस्थान को बदनाम कर रहे हैं। द्रविड़ कझगम के नेता काली पूंगुंद्रन ने कहा कि कामकोटि ने शर्मनाक बातें कहीं हैं। उन्होंने एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि गौ मूत्र में हानिकारक बैक्टीरिया होते हैं। यह इंसान के इस्तेमाल लायक नहीं होता।
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