
Russian Crude Oil: अमेरिकी दबाव के बाद भी भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार अगर भारत रूस से तेल आयात बंद कर देता है तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत का रूसी तेल खरीदना जरूरी है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात किए जाने वाले सामानों पर 25% टैरिफ लगाया है। यह 1 अगस्त से प्रभावी हो गया। उन्होंने रूस से तेल खरीदने के चलते भारत पर "अतिरिक्त दंड" लगाने की घोषणा की थी। हालांकि, अभी तक जानकारी नहीं है कि कितना जुर्माना लगाया जाएगा।
भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीददार है। इस मामले में चीन दूसरे नंबर पर है। रूस रोज करीब 45 लाख बैरल तेल निर्यात करता है। इसमें से करीब 20 लाख बैरल भारत खरीदता है। रूस रोज 95 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है। यह दुनिया भर में तेल की मांग का लगभग 10% है।
रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद अमेरिका ने रूस के तेल निर्यात पर बैन लगाया था। इससे रूसी तेल के बाजार से बाहर हो जाने की आशंका थी। मार्च 2022 में कच्चे तेल की कीमत 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। उस समय भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ा दिया था। इससे दुनिया में तेल की कीमतों में स्थिरता आई।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। अगर भारत को रूसी तेल से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया गया तो आयात बिल 9-11 अरब डॉलर (78687-96174 करोड़ रुपए) तक बढ़ सकता है। पिछले वित्त वर्ष में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 1.14 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए। इसे साफ कर पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन तैयार किए गए।
रूस दुनिया में कच्चे तेल, कंडेनसेट और शुष्क प्राकृतिक गैस का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक था। यह 2023 में कोयला और प्राकृतिक गैस का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक था। 2022 में यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद कई देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए। रूस के एनर्जी सेक्टर को टारगेट किया गया। रिस्टैड एनर्जी के अनुसार 1 जनवरी 2024 तक रूस का प्रमाणित तेल भंडार 58 बिलियन बैरल था। 2023 में रूस का प्रमाणित प्राकृतिक गैस भंडार 1,559 ट्रिलियन क्यूबिक फीट (टीसीएफ) था।
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