
नई दिल्ली. सीमा विवाद को लेकर चीन से जारी तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को चार दिन के रूस दौरे पर रवाना होंगे। वे मास्को में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेंगे। बताया जा रहा है कि रूस पहुंचने से पहले वे ईरान भी जा सकते हैं। वहीं, मास्को में एस जयशंकर चीनी समकक्ष वांग यी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी कर सकते हैं।
रूस यात्रा से एक दिन पहले विदेश मंत्री ने चीन से जारी विवाद को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, एलएसी पर स्थिति काफी गंभीर है। इस मामले को हल करने के लिए राजनीतिक स्तर पर गहराई से बातचीत की जरूरत है। जयशंकर की यह यात्रा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे के कुछ दिन बाद ही है। राजनाथ सिंह एससीओ में रक्षा मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे। एससीओ के इतर उन्होंने चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंगे के साथ करीब दो घंटे बैठक की थी।
राजनाथ सिंह ने दिया चीन को कड़ा संदेश
इस बैठक में राजनाथ सिंह ने चीनी सेना की हरकतों को सबके सामने रख दिया था। उन्होंने साफ कर दिया था कि चीनी सेना को सख्ती से एलएसी का सम्मान करना चाहिए। इसे बदलने की एकतरफा कोशिश नहीं करनी चाहिए।
भारत ने घुसपैठ की कोशिश की थी नाकाम
एलएसी पर चीन लगातार घुसपैठ की कोशिश में जुटा है। इससे पहले 29-30 अगस्त की रात चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की थी। इसके भारतीय जवानों ने नाकाम कर दिया था। इसके बाद चीनी सैनिक पीछे हटने को मजबूर हो गए थे। भारत ने यहां एक अहम चोटी पर भी कब्जा किया था। इससे पहले 15 जून को दोनों देशों की सेनाओं के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी। इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। वहीं, 40 चीनी सैनिक भी मारे गए थे। हालांकि, चीन ने मारे गए अपने सैनिकों की संख्या की जानकारी नहीं दी।
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