
नई दिल्ली: इज़राइल के समर्थन में अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु संयंत्रों पर किए गए हमले (ऑपरेशन मिडनाइट हैमर) में भारतीय हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल अमेरिकी सेना ने किया, इस अफवाह को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है। ईरान टाइम्स समेत कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अमेरिका ने बी-2 बॉम्बर विमानों को ईरान भेजने के लिए भारतीय हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसे पूरी तरह से नकार दिया है। पाकिस्तान समर्थक कई एक्स अकाउंट्स ने भी यह प्रचारित किया था कि भारत ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए अपना हवाई क्षेत्र इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।
ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र समेत अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमले में बी-2 स्पिरिट बॉम्बर विमानों के लिए भारत ने रास्ता दिया, यह दावा ईरान समर्थक एक्स अकाउंट्स पर किया जा रहा था। पाकिस्तान समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी यही आरोप लगाया गया। हालांकि, केंद्र सरकार के तहत काम करने वाले पीआईबी फैक्ट चेक ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के बॉम्बर विमान भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश किए बिना ही ईरान पहुंचे।
रविवार तड़के अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों - नतान्ज़, इस्फ़हान और फोर्डो - पर हमला किया। इस ऑपरेशन का आधिकारिक नाम 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' था। इस ऑपरेशन में 125 से ज़्यादा अमेरिकी सैन्य विमानों और बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स ने हिस्सा लिया। अमेरिका ने इस ऑपरेशन में 14 GBU-57 बंकर-बस्टर बम और फारस की खाड़ी और अरब सागर में तैनात अमेरिकी पनडुब्बियों से 30 से ज़्यादा टॉमहॉक मिसाइलें दागीं। ज़मीन के नीचे स्थित फोर्डो परमाणु संयंत्र को तबाह करने के लिए बंकर-बस्टर बम का इस्तेमाल किया गया। अमेरिका से बिना रुके 37 घंटे की उड़ान के बाद बी-2 विमान ईरान पहुंचे। बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर एक बार उड़ान भरने पर 18,500 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया कि ईरान के तीन परमाणु केंद्रों पर अमेरिका के हमले ने ईरानी परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। वहीं, इज़राइल की मदद के लिए अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले की दुनिया भर के कई देशों ने निंदा की है।
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