
नई दिल्ली. सरकार आत्मनिर्भर भारत के तहत ना सिर्फ हथियारों का आयात कम कम करना चाहती है, बल्कि स्वदेशी हथियारों को दूसरे देशों को बेचना भी चाहती हा। इसके लिए मोदी सरकार ने रोडमैप भी तैयार कर लिया है। इन हथियारों को बेचने के लिए डिप्लोमैटिक चैनल का इस्तेमाल किया जाएगा। यह जानकारी यूनियन डिफेंस प्रॉडक्सन सेक्रेटरी राजकुमार ने दी। वहीं, भारत में निजी क्षेत्र ने पहली मिसाइल बना ली है। तीसरी पीढ़ी की इस एंटी टैंक मिसाइल का परीक्षण अगले 1 साल के भीतर होने की उम्मीद है।
सेना को स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल से नहीं है परेशानी
आर्मी में लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने कहा कि आर्मी को स्वदेशी हथियारों का इस्तेमाल करने में कोई परेशानी नहीं है। बस क्वॉलिटी के साथ समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, जब समय और हालात बदतर होते हैं, तो दूसरे देश हथियारों की टेक्नोलॉजी शेयर नहीं करना चाहते।
स्वदेशी हथियारों से लड़कर ही जंग जीतेगी सेना
रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में 01 रक्षा उत्पादों के आयात पर बैन की घोषणा की है। ऐसे समय में निजी क्षेत्र द्वारा मिसाइल बनाने की खबर आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है।
लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने कहा, सेना स्वदेशी हथियारों से लड़कर ही जंग जीतेगी। लेकिन हमें ये ध्यान रखना होगा कि भविष्य की जंग कुछ अलग तरह की होंगी, हमें पुराने हथियारों को छोड़कर नई तकनीकी पर फोकस करना होगा।
सेना के शीर्ष अधिकारियों की निजी क्षेत्र के दिग्गजों के साथ हुई बैठक
भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों, रक्षा उत्पादन विभाग और निजी क्षेत्र के दिग्गजों के बीच सोमवार को विचार विमर्श बैठक हुई। इसी दौरान निजी क्षेत्र में मिसाइल तैयार होने की जानकारी दी गई। सेना ने बताया कि पिछले 20 महीने में स्वदेशी रक्षा उत्पादन के 30 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं।
5000 करोड़ के प्रोजेक्ट का जल्द होगा ऐलान
सेना के अफसरों ने बताया, पिछले महीने एयर डिफेंस मिसाइलों के लिए टेंडर जारी किया गया है। अभी तक 28 प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है। 5000 करोड़ रुपए के नए प्रोजेक्ट्स का जल्द ऐलान किया जाएगा।
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