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निगरानी और टोही ड्रोन (ISR Drones)
इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और दुश्मन के ठिकाने की टोह लेने के लिए होता है।
भारत के पास हैं
TAPAS BH-201 (Tactical Advanced Platform for Aerial Surveillance)
रुस्तम (DRDO ने बनाया)
हेरोन (इजरायल से लिया गया)
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हथियार से लैस लड़ाकू ड्रोन (UAV)
इसमें ऐसे UAV (Unmanned Aerial Vehicles) आते हैं जो मिसाइलों लॉन्च कर सकें या बम गिरा सकें।
भारत के पास है
घातक (DRDO इसपर काम कर रहा है)
हेरोन टीपी (इजरायल से लिया गया है)
35
सुसाइड ड्रोन (Loitering Munitions)
ये ड्रोन टारगेट क्षेत्र पर उड़ान भरते हैं और लक्ष्य की पहचान होने पर हमला कर देते हैं।
भारत के पास है
मॅगस्ट्रा (सोलर इंडस्ट्रीज और ZMotion द्वारा निर्मित)
वार्मेट (पोलैंड से लिया गया है)
45
कमर्शियल या मॉडिफाइड सिविलियन ड्रोन
ये ड्रोन नागरिकों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें मॉडिफाइड कर अक्सर अवैध सीमा पार गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
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झुंड ड्रोन
दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करने के लिए कई ड्रोन एक साथ झुंड बनाकर उड़ते हैं। डीआरडीओ और निजी फर्म इस तरह के ड्रोन पर काम कर रहे हैं।
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