
PM मोदी की अप्रूवल रेटिंग। इस साल देश में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसमें मात्र 2 महीने से भी कम का समय बचा है। हालांकि, इससे पहले पीएम मोदी की काम की चर्चा देश भर में हो रही है और इसका हलिया सबूत भी आंकड़ों की मदद से देखने को मिला है। हाल ही में इप्सोस इंडियाबस ने फरवरी 2024 के दौरान पीएम अप्रूवल रेटिंग सर्वे का डेटा जारी किया है। नए डेटा के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रूवल रेटिंग में 75 फीसदी अंक हासिल किए हैं। ये अपने काम को संभालने के दौरान पिछले साल सितंबर में 65 फीसदी अप्रूवल रेटिंग से ज्यादा है।
देश भर के लोगों ने काम की वजह से जहां पीएम मोदी को 75 फीसदी अंक दिया है। वहीं देश के कुछ शहरों और समूहों ने पीएम मोदी को उनके प्रदर्शन के लिए और ज्यादा अंक दिए हैं। इनमें उत्तरी भारत के लोगों ने 92 प्रतिशत, पूर्वी भारत के लोगों ने 84 प्रतिशत और पश्चिम भारत के लोगों ने 80 प्रतिशत अंक दिए हैं। इस बीच टियर 1 और टियर 3 शहरों ने क्रमश 84 और 80 प्रतिशत अप्रूवल दिया।
दक्षिण भारत के लोगों ने दिया सबसे कम वोट
प्रधानमंत्री को अप्रूवल रेटिंग के लिए जिन लोगों ने वोट दिया है, उनमें 45+ आयु वर्ग के 75 फीसदी, जबकि 18-30 वर्ष ने 75 फीसदी लोग शामिल है। सर्वे में मोदी को महानगरों में थोड़ी कम रेटिंग हासिल हुई है। टियर 2 शहरों वालों ने क्रमांक 62 और 64 फीसदी वोट दिया है। वहीं स्वरोजगार वालों ने 59 प्रतिशत और दक्षिण भारत वालों ने मात्र 35 प्रतिशत वोट दिया है।
सर्वेक्षण के अनुसार, जिन क्षेत्रों में मोदी सरकार ने अच्छा प्रदर्शन किया है इसमें मुख्य रूप से शिक्षा, स्वच्छता, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र हैं। वहीं जिन क्षेत्रों में सरकार ने औसत काम किया है उनमें प्रदूषण और पर्यावरण के मुद्दे (56 प्रतिशत), गरीबी कम करना (45 प्रतिशत), मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना (44 प्रतिशत), बेरोजगारी का समाधान करना (43 प्रतिशत), और भ्रष्टाचार हटाना (42 प्रतिशत) शामिल हैं।
इप्सोस इंडियाबस का सर्वेक्षण को लेकर बयान
इप्सोस इंडियाबस का कहना है कि उसने सर्वेक्षण के लिए एक संरचित प्रश्नावली का इस्तेमाल किया और विभिन्न घरों के 2,200 से अधिक लोगों को शामिल किया. इनमें देश के सभी चार क्षेत्रों के दोनों लिंगों के वयस्कों को शामिल किया गया।इप्सोस इंडियाबस का कहना है कि सर्वेक्षण महानगरों, टियर 1, टियर 2 और टियर 3 शहरों में आयोजित किया गया था, जो शहरी भारतीयों का एक प्रतिनिधि दृष्टिकोण प्रदान करता है।
उत्तरदाताओं से आमने-सामने और ऑनलाइन सर्वेक्षण किया गया। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने के लिए डेटा को जनसांख्यिकी और शहर-वर्ग की आबादी के आधार पर महत्व दिया गया था।
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