कनाडा के चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों का भारत ने किया खंडन, कहा-'दूसरे देशों की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करना हमारी नीति नहीं'

Published : Apr 06, 2024, 09:18 AM ISTUpdated : Apr 06, 2024, 09:21 AM IST
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सार

भारत ने कनाडा की जासूसी एजेंसी CSIS द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कनाडा द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए ओटावा पर पाखंड का आरोप लगाया।

भारत-कनाडा के रिश्ते। कनाडाई जासूसी एजेंसी CSIS ने भारत पर आरोप लगाया था कि कैसे भारत ने उनके देश के चुनावों में हस्तक्षेप करने की कोशिश की। इस पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कनाडा की जासूसी एजेंसी CSIS द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कनाडा द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए ओटावा पर पाखंड का आरोप लगाया। कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) की रिपोर्ट को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मुख्य मुद्दा अतीत में नई दिल्ली के मामलों में ओटावा का हस्तक्षेप है।

एक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल नने कहा, "हमने कनाडाई आयोग की जांच के बारे में मीडिया रिपोर्ट देखी हैं। हम कनाडाई चुनावों में भारतीय हस्तक्षेप के ऐसे सभी आधारहीन आरोपों को दृढ़ता से खारिज करते हैं।"उन्होंने कहा, ''दूसरे देशों की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करना भारत सरकार की नीति नहीं है। वास्तव में इसके विपरीत ये कनाडा है, जो हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है।"

CSIS रिपोर्ट ने क्या कहा?

कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा के एक दस्तावेज में कहा गया है कि संघीय जांच आयोग 2019 और 2021 में देश के चुनावों में भारत, पाकिस्तान, चीन और रूस जैसे विदेशी देशों के संभावित हस्तक्षेप की जांच कर रहा है। CSIS ने दस्तावेजों में आरोप लगाया कि 2021 में भारत सरकार का कनाडा में एक भारतीय सरकारी प्रॉक्सी एजेंट का इस्तेमाल करने सहित हस्तक्षेप करने का इरादा था और संभवत गुप्त गतिविधियां संचालित की गईं। 

कनाडाई जासूसी एजेंसी ने आगे आरोप लगाया कि भारत सरकार ने 2021 में विदेशी हस्तक्षेप गतिविधियां चलाई जो, छोटी संख्या में चुनावी जिलों पर केंद्रित थीं।" CSIS दस्तावेज़ में कहा गया है कि भारत सरकार ने उन लोगों को को निशाना बनाया क्योंकि भारत की धारणा थी कि भारत-कनाडाई मतदाताओं का एक हिस्सा खालिस्तानी आंदोलन या पाकिस्तान समर्थक राजनीतिक रुख के प्रति सहानुभूति रखता था।

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