
नई दिल्ली। भारत की अधिकतर मुस्लिम महिलाएं समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के पक्ष में हैं। यह जानकारी न्यूज18 द्वारा कराए गए अमेगा सर्वे में सामने आई है। सर्वे से पता चला है कि 67.2 फीसदी मुस्लिम महिलाएं चाहती हैं कि शादी, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में UCC सभी भारतीयों के लिए लागू हो।
25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कराए गए सर्वे में 8,035 मुस्लिम महिलाओं ने हिस्सा लिया। इसमें 18-65 साल की महिलाओं से उनके विचार जाने गए। सर्वे में विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों की महिलाओं को शामिल किया गया। विवाहित और अविवाहित महिलाओं ने सर्वे सें हिस्सा लिया। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा गया कि सर्वे में हर तरह की पढ़ाई के स्तर वाली महिलाओं को शामिल किया जाए।
दरअसल, केंद्र सरकार आने वाले संसद के मानसून सत्र में यूसीसी कानून को लेकर बिल लाने वाली है। यूसीसी को लेकर कानून बनता है तो भारत के सभी नागरिकों चाहे वे किसी भी धर्म या समाज के हों उनपर एक जैसे कानून लागू होंगे। यह कानून अन्य बातों के अलावा विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत जैसे व्यक्तिगत मामलों को कवर करेगा। वर्तमान में भारत में धर्मों के आधार पर व्यक्तिगत कानून अलग-अलग हैं।
सर्वे में क्या मिला?
जब महिलाओं से पूछा गया कि क्या आप सभी भारतीयों के लिए एक जैसे कानून का समर्थन करती हैं तो सर्वे में शामिल 67.2 फीसदी महिलाओं ने हां कहा। 25.4 फीसदी महिलाओं ने नहीं और 7.4 फीसदी महिलाओं ने कह नहीं सकते या नहीं जानती जैसे जवाब दिए।
बता दें कि इन दिनों यूसीसी को लेकर खूब चर्चा हो रही है। मुस्लिम संगठनों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि यूसीसी से सभी धर्म प्रभावित होंगे। जहां तक सर्वे में शामिल महिलाओं की शैक्षिक स्थिति की बात है तो 68.4 प्रतिशत या 2,076 स्नातक महिलाओं ने कहा कि वे यूसीसी का समर्थन करती हैं। 27 प्रतिशत ने कहा कि वे इसका समर्थन नहीं करती हैं। 18-44 साल की 69.4 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे यूसीसी के समर्थन में हैं। वहीं, 24.2 प्रतिशत ने कहा कि वे सभी के लिए समान कानून नहीं चाहती हैं।
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