भारत के इस हाइपरसोनिक मिसाइल से कापेंगे चीन-पाक, जानें कितना है रेंज

Published : Nov 17, 2024, 10:46 AM ISTUpdated : Nov 17, 2024, 11:15 AM IST
Hypersonic Missile

सार

डीआरडीओ ने 1500 किमी. से ज़्यादा मारक क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह उपलब्धि भारत को चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा करती है।

नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। भारत सरकार की संस्था डीआरडीओ ने ऐसा ताकतवर हाइपरसोनिक मिसाइल तैयार किया है जिससे चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश कापेंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को X पर पोस्ट कर बताया कि भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल टेस्ट किया है। इस मिसाइल को 1500km से अधिक की दूरी तक मार करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अपने साथ कई तरह के विस्फोटक ले जा सकता है। मिसाइल को ओडिशा के तट से दूर डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्च किया गया। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी सैन्य टेक्नोलॉजी है।

 

 

 

 

टेस्ट के दौरान मिसाइल को ट्रैक करने के लिए निगरानी करने वाले कई सिस्टम तैनात किए गए थे। डीआरडीओ ने शनिवार रात टेस्ट किया था। रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव और डीआरडीओ अध्यक्ष ने सफल परीक्षण के लिए टीम को बधाई दी।

क्यों बेहद महत्वपूर्ण हैं हाईपरसोनिक मिसाइल

मिसाइल के मामले में उसकी रफ्तार बेहद मायने रखती है। तेज रफ्तार वाले मिसाइल को एयर डिफेंस सिस्टम से रोकना कठिन होता है। हाईपरसोनिक मिसाइल ऐसे मिसाइल को कहा जाता है जो हवा में आवाज की गति से 5 गुना तेज रफ्तार से आगे बढ़ सके। इसकी रफ्तार 6,125 km/h (Mach 5) से करीब 24,140 km/h (Mach 20) तक हो सकती है। बहुत अधिक रफ्तार मिसाइल को ट्रैक और इंटरसेप्ट करना मुश्किल बना देती है।

हाइपरसोनिक मिसाइलों के दो मुख्य प्रकार हैं। एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स (HGVs) और दूसरा हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें। HGVs को रॉकेट बूस्टर का इस्तेमाल करके बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह लॉन्च किया जाता है। एक निश्चित ऊंचाई पर पहुंचने के बाद HGV बूस्टर से अलग हो जाता है और अपने टारगेट की ओर ग्लाइड करता है। यह अपनी दिशा में थोड़े बहुत बदलाव भी कर सकता है।

हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें अपनी उड़ान के दौरान हाइपरसोनिक गति बनाए रखने के लिए स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल करती हैं। ये ऊंचाई पर उड़ती हैं। इन्हें रडार के पकड़ पाना बेहद कठिन होता है।

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