भारत अमेरिका से खरीदेगा MQ 9 Reaper ड्रोन, इसके हमले से मारा गया था अल कायदा प्रमुख जवाहिरी

Published : Dec 21, 2022, 11:10 PM IST
भारत अमेरिका से खरीदेगा MQ 9 Reaper ड्रोन, इसके हमले से मारा गया था अल कायदा प्रमुख जवाहिरी

सार

भारत अमेरिका से 30 एमक्यू 9 रीपर ड्रोन खरीद सकता है। 10-10 ड्रोन तीनों सेनाओं को मिलेंगे। इस ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी रखने के साथ ही हमला करने में भी होता है। यह ड्रोन लेजर गाइडेड हेलफायर मिसाइल से लैस है।

नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से मिल रही चुनौती को देखते हुए भारत अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है। इसके लिए ताकतवर हथियार भारत में विकसित और तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही दूसरे देशों से भी अत्याधुनिक हथियार खरीदे जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत अमेरिका से एमक्यू-9 रीपर (MQ 9 Reaper) ड्रोन खरीद सकता है। इसी ड्रोन द्वारा किए गए हमले में अल कायदा प्रमुख अल-कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी मारा गया था। 

एमक्यू-9 रीपर ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमला दोनों काम में होता है। यह ड्रोन लेजर गाइडेड हेलफायर मिसाइल का इस्तेमाल जमीन पर मौजूद टारगेट को तबाह करने के लिए करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत अपने तीनों सेनाओं (थल सेना, वायु सेना और नौसेना) के लिए एमक्यू-9 रीपर ड्रोन खरीदने की तैयारी कर रहा है। 

लीज पर लेकर चलाया जा रहा काम
वर्तमान में भारत अमेरिका से एमक्यू-9 रीपर ड्रोन लीज पर लेकर काम चला रहा है। लीज पर लिए गए ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ निगरानी रखने के लिए हो रहा है। 2017 में भारतीय नौसेना के लिए दो साल के लिए एमक्यू-9 रीपर ड्रोन लीज पर लिए गए थे। हिंद महासागर में चीनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ने के चलते यह फैसला लिया गया था। 

निगरानी के मामले में ड्रोन की अच्छी उपयोगिता पाए जाने पर नौसेना के इसके लीज को आगे बढ़ाया। 2020 में चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तनातनी होने पर भारत ने अमेरिकी कंपनी से दो  MQ-9A ड्रोन लीज पर लिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एमक्यू-9 रीपर की खरीद के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की गुरुवार को होने वाली बैठक में चर्चा हो सकती है।

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30 रीपर ड्रोन की है जरूरत
भारत सरकार नौसेना, वायु सेना और थल सेना के लिए 30 MQ-9 रीपर ड्रोन खरीदने की योजना बना रही है। तीनों सेनाओं को 10-10 ड्रोन मिल सकते हैं। MQ-9 रीपर ड्रोन को अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स बनाती है। इस ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमले के लिए किया जाता है। इसे ग्राउंड स्टेशनों और नौसेना के जहाजों से भी नियंत्रित किया जा सकता है।

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