
नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान के बीच पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट J-35A को लेकर बात चल रही है। डील होती है तो चीन दो साल के अंदर पाकिस्तान को 40 J-35A विमान दे सकता है। इससे पाकिस्तान की वायुसेना को स्टील्थ विमान के मामले में बढ़त मिल जाएगी। भारत के पास अभी कोई भी स्टील्थ फाइटर जेट नहीं है। भारत की वायुसेना के पास सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान फ्रांस से लिया गया राफेल है। भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदे हैं। नौसेना के लिए 26 राफेल विमान खरीदे जाने हैं। आइए J-35A और राफेल की तुलना करते हैं और जानते हैं कि कौन किस मामले में आगे है।
लड़ाकू विमान के लिए रडार को चकमा देने की ताकत बहुत अहम होती है। इससे वह दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला कर पाता है और बिना नुकसान सहे लौटता है। यही वजह है कि दुनिया भर में स्टील्थ फाइटर जेट की अधिक मांग है। J-35A पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ विमान है। इसका डिजाइन अमेरिका के F-35 से कॉपी किया गया है। विमान को कम से कम रडार क्रॉस सेक्शन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है ताकि इसे रडार की पकड़ में आने से बचाया जा सके।
राफेल 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। यह स्टील्थ फाइटर जेट नहीं है। इसके रडार सिग्नेचर को कम रखने की कोशिश की गई है, लेकिन यह स्टील्थ फाइटर जेट की तुलना में रडार पर जल्द नजर आता है। हालांकि, J-35A की स्टील्थ क्षमता कितनी है यह अभी साबित होना बाकी है।
राफेल और J-35A दोनों दो इंजन वाले विमान हैं। इंजन की क्षमता के मामले में राफेल बेहतर है। J-35A में दो WS-13 इंजन लगे हैं। यह रूस के RD-33 इंजन पर आधारित है। यह इंजन विमान को अधिक रफ्तार तो देता है लेकिन इंधन अधिक इस्तेमाल करता है। इसके साथ ही यह कम भरोसेमंद भी है। राफेल में दो M88-2 इंजन लगे हैं। प्रत्येक 75kN का थ्रस्ट देता है। ये इंजन अधिक भरोसेमंद और कम इंधन खर्च करने वाले हैं।
चीन का J-35A रफ्तार के मामले में राफेल से आगे बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इसकी अधिकतम गति 2.0 मैक (2,385 किलोमीटर प्रति घंटा) है। वहीं, राफेल की अधिकतम स्पीड 1,389 प्रति घंटा है। J-35A का रेंज सिर्फ 1,200 किलोमीटर है। वहीं, राफेल का रेंज 3700 किलोमीटर है। दोनों विमान में हवा में इंधन भरने की क्षमता है। इससे इनका रेंज बढ़ाया जा सकता है।
J-35A में AESA रडार, इन्फ्रारेड सर्च और ट्रैक सिस्टम लगे हैं। राफेल की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली थेल्स की स्पेक्ट्रा है। स्पेक्ट्रा में सॉलिड स्टेट ट्रांसमीटर तकनीक, एक DAL लेजर चेतावनी रिसीवर, मिसाइल चेतावनी, डिटेक्शन सिस्टम और जैमर शामिल हैं। राफेल में RBE2 पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड रडार लगा है। यह एक साथ आठ टारगेट को ट्रैक कर सकता है। J-35A 7 हजार किलोग्राम वजन तक के मिसाइल लेकर उड़ सकता है। वहीं, राफेल 9 हजार किलोग्राम वजन तक के मिसाइल और बम लेकर उड़ सकता है।
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