
बेंगलुरु। कर्नाटक के चामराजनगर जिले में गुरुवार को भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) का एक विमान हादसे का शिकार हो गया। बोगापुरा गांव के पास सूर्य किरण ट्रेनर विमान क्रैश हो गया। जमीन पर गिरने से विमान के टुकड़े-टुकड़े हो गए। उसमें सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं। एक पायलट महिला हैं।
हादसा रुटीन ट्रेनिंग उड़ान के दौरान हुआ। विमान के जमीन पर गिरने से पहले ही दोनों पायलट इजेक्ट करने में सफल रहे। हादसा क्यों हुआ यह जानने के लिए वायु सेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश दिया है। हादसे के बाद गांव के लोग मौके पर जुट गए। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस आई और मलबे को सुरक्षित किया। विमान के टुकड़े काफी दूर तक फैल गए थे।
इजेक्शन सीट ने बचाई पायलटों की जान
इजेक्शन सीट की वजह से हादसे का शिकार हुए दोनों पायलट सुरक्षित बच गए। इजेक्शन सीट लड़ाकू विमानों में लगाए जाते हैं। इन विमानों की रफ्तार बहुत अधिक तेज होती है। इसके चलते हादसा होने पर पायलट को अपनी जान बचाने के लिए बेहद कम समय मिलता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए इजेक्शन सीट विकसित किया गया है। पायलट जिस सीट पर बैठते हैं उसमें विस्फोटकों और रॉकेट का ऐसा सिस्टम होता है जो बस एक लीवर खींचे जाने पर काम कर देता है।
पायलट को जब लगता है कि वह विमान को कंट्रोल नहीं कर पाएगा और हादसा होना ही है तो वह इजेक्शन सीट के लीवर को खींचता है। इससे विमान का कॉकपिट खुलता है पायलट का सीट विमान से बाहर निकल जाता है। इसके बाद सीट में लगा पैराशूट खुलता है, जिससे मदद से पायलट नीचे आता है।
पिछले महीने MiG-21 विमान हुआ था क्रैश
गौरतलब है कि 8 मई को वायु सेना का एक मिग-21 विमान हादसे का शिकार हो गया था। घटना राजस्थान के हनुमानगढ़ में घटी थी। इस हादसे में पायलट तो बच गए थे, लेकिन विमान के रिहायशी इलाके में गिरने से तीन आम लोग मारे गए थे।
मिग-21 रूटीन ट्रेनिंग उड़ान पर था। इसी दौरान हादसा हो गया था। वक्त रहते पायलट इजेक्ट करने में सफल रहा। उसे हल्की चोट आई। इस घटना की जांच की जा रही है। हादसे के दो सप्ताह बाद वायु सेना ने सभी मिग-21 विमान को ग्राउंड कर दिया है। रूस द्वारा बनाया गया मिग-21 पहला सुपरसोनिक फाइटर जेट था। एक वक्त यह भारतीय वायु सेना का मुख्य विमान था।
एक इंजन और डेल्टा विंग डिजाइन वाला यह विमान हवा में अपनी तेजी के लिए जाना जाता है। हालांकि यह बहुत अधिक हादसे का शिकार भी होता है। भारतीय वायु सेना के 400 से अधिक मिग 21 विमान हादसे का शिकार हुए हैं। इसके चलते बहुत से पायलटों की मौत हुई है। यही वजह है कि इस विमान को फ्लाइंग कॉफिन जैसा नाम मिला है।
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