भारतीय सेना की नई वर्दी का हुआ पेटेंट, इन खूबियों की वजह से बेहद शानदार है यह लड़ाकू वर्दी

Published : Nov 03, 2022, 09:27 PM ISTUpdated : Nov 03, 2022, 09:29 PM IST
भारतीय सेना की नई वर्दी का हुआ पेटेंट, इन खूबियों की वजह से बेहद शानदार है यह लड़ाकू वर्दी

सार

भारतीय सेना के अधिकृत किए बगैर इस डिजाइन या इस पैटर्न का निर्माण या बिक्री पूरी तरह से अवैध और कार्रवाई योग्य होगा। इसका उल्लघंन करने वालों को कानूनी कार्रवाईयों का सामना करना पड़ सकता है।

Indian Army new combat uniform patent: भारतीय सेना ने अपनी नई लड़ाकू वर्दी का पेटेंट करा लिया है। कोलकाता स्थित पेटेंट्स, डिजाइन्स एंड ट्रेडमार्क के महानियंत्रक आफिस में भारतीय सेना की नई वर्दी का पेटेंट करा लिया गया है। पेटेंट मैगजीन में 21 अक्टूबर को इसके रजिस्ट्रेशन की रिपोर्ट पब्लिश की गई है। सेना ने इस साल 15 जनवरी को सेना दिवस परेड के दौरान नए डिजिटल पैटर्न लड़ाकू वर्दी का अनावरण किया था।

कैसी है सेना की नई लड़ाकू वर्दी?

सेना ने नई लड़ाकू वर्दी को समकालीन रूप एवं बेहतर तरीके से डिजाइन किया है। नई वर्दी का वजन काफी हल्का है। इसकी फैब्रिक मजबूत, सांस लेने योग्य, जल्दी सूखने वाला है। इसका रखरखाव भी काफी आसान है। एक अधिकारी ने बताया कि वर्दी की विशिष्टता यह है कि इसमें महिलाओं की लड़ाकू वर्दी को भी उनके लिए फ्रेंडली बनाया गया है।

क्यों कराया गया है इस यूनिफार्म का पेटेंट?

सेना ने अपनी नई वर्दी का पेटेंट करा लिया है तो इसका मतलब यह है कि अब इस यूनिफार्म की डिजाइन व अन्य पैटर्न की इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी राइट्स इसी के पास है। भारतीय सेना के अधिकृत किए बगैर इस डिजाइन या इस पैटर्न का निर्माण या बिक्री पूरी तरह से अवैध और कार्रवाई योग्य होगा। इसका उल्लघंन करने वालों को कानूनी कार्रवाईयों का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय सेना की वर्दी डिजाइन का दुरुपयोग करने पर किसी भी सक्षम अदालत में केस का सामना करना पड़ सकता है।

50 हजार सेट पहले ही खरीदे जा चुके

भारतीय सेना की नई वर्दी को कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट्स से करीब 50 हजार सेट खरीदा जा चुका है। यह दिल्ली, लेह, बीडी बारी, श्रीनगर, उधमपुर, अंडमान और निकोबार, जबलपुर , मासीमपुर, नारंगी, दीमापुर, बागडोगरा, लखनऊ, अंबाला, मुंबई और खड़की सहित 15 सीएसडी डिपो को डिस्ट्रीब्यूट किए जा चुके हैं। नई वर्दी की सिलाई में नागरिकों और सैन्य दर्जियों को प्रशिक्षित करने के लिए वर्कशॉप आयोजित किया जा रहा है। इन वर्कशॉप्स को दिल्ली निफ्ट के ट्रेनर्स द्वारा कोआर्डिनेट कर प्रशिक्षित किया जा रहा है। दिल्ली में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) द्वारा इसकी सिलाई के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दिया जा रहा है। जेसीओ व ओआर के लिए करीब 11.7 लाख सेटों की थोक खरीदी की गई है। माना जा रहा है कि एक वर्दी सेट की लाइफ साइकिल करीब 15 महीने है।

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