अमेरिकी ने भारतीय धार्मिक स्वतंत्रता पर उठाए सवाल, इंडियन माइनारिटी फाउंडेशन ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर जताया संदेह

Published : Jun 27, 2024, 09:42 PM ISTUpdated : Jun 28, 2024, 01:22 AM IST
IMF

सार

रिपोर्ट, अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर है। इसमें विभिन्न देशों की धार्मिक स्वतंत्रता का तुलनात्मक विवरण है। इस रिपोर्ट के आने के बाद आईएमएफ (Indian Minorities foundation) ने कड़ा ऐतराज जताया है।

USCIRF International Religious Freedom report: अमेरिका ने एक बार फिर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता न होने का दावा करते हुए अपनी रिपोर्ट में उसे अफगानिस्तान, क्यूबा, चीन जैसे कट्टर देशों के साथ खड़ा कर दिया है। अमेरिका की यूएससीआईआरएफ ने एक रिपोर्ट जारी किया है। रिपोर्ट, अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर है। इसमें विभिन्न देशों की धार्मिक स्वतंत्रता का तुलनात्मक विवरण है। इस रिपोर्ट के आने के बाद आईएमएफ (Indian Minorities foundation) ने कड़ा ऐतराज जताया है। इंडियन माइनारिटीज फाउंडेशन ने भारत को कट्टरपंथी देशों के साथ रखने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराने के साथ रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उटाए हैं।

 

 

क्या कहा इंडियन माइनारिटीज फाउंडेशन ने रिपोर्ट को लेकर?

इंडियन माइनारिटीज फाउंडेशन ने गुरुवार को यूएससीआईआरएफ की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट की कड़ी की है। फाउंडेशन ने कहा कि USCIRF द्वारा भारत को अफ़गानिस्तान, क्यूबा, ​​उत्तर कोरिया, रूस और चीन जैसे सत्तावादी शासनों के साथ लेबल करने के प्रयास भारत के लोकतांत्रिक ढांचे, जीवंत नागरिक समाज और बहुलवादी इतिहास की अनदेखी करते हैं। यह गलत चित्रण रिपोर्ट की विश्वसनीयता और भारत के धार्मिक स्वतंत्रता परिदृश्य की समझ को कमज़ोर करता है।

USCIRF रिपोर्ट का यह है सार...

यूएससीआईआरएफ की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2024 में कहा गया है कि 2023 से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति बिगड़ती जा रही है। इसमें आरोप लगाया गया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार भेदभावपूर्ण राष्ट्रवादी नीतियों को मजबूत कर रही, घृणास्पद बयानबाजी को बढ़ावा दे रही और सांप्रदायिक हिंसा को संबोधित करने में विफल रही है जिससे मुस्लिम, ईसाई, सिख, दलित, यहूदी और आदिवासी (स्वदेशी लोग) असमान रूप से प्रभावित हो रहे। दरअसल, इस अमेरिकी रिपोर्ट में दुनिया में अल्पसंख्यकों के लिए सबसे खराब देशों अफगानिस्तान, क्यूबा, उत्तर कोरिया, चीन और रूस जैसे देशों की श्रेणी में भारत को खड़ा कर दिया गया है। इन देशों में लगातार अल्पसंख्यकों के नरसंहार और मानवाधिकारों के हनन की बात सामने आती रही हैं।

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