
नई दिल्ली। इसरो ने अपनी IMS-1 सैटेलाइट बस टेक्नोलॉजी को बेंगलुरू की एक प्राइवेट फर्म को ट्रांसफर कर दिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ऐलान किया है कि उसने अपनी IMS-1 सैटेलाइट बस टेक्नोलॉजी को बेंगलुरु की अल्फा डिज़ाइन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर किया है। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, बुधवार को न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के माध्यम से किया गया। इस टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर के साथ भारतीय प्राइवेट सेक्टर ने देश के स्पेस सेक्टर में प्रवेश कर लिया है। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सुविधा एनएसआईएल के एमडी और चेयरपर्सन डी राधाकृष्णन द्वारा एडीटीएल के चेयरपर्सन और एमडी कर्नल एचएस शंकर को दी गई।
भारतीय प्राइवेट कंपनीज का स्पेस सेक्टर में हुई एंट्री
कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर इस ऐतिहासिक शुरूआत के बारे में बात की है। कंपनी ने कहा कि यह एक भारतीय निजी कंपनी द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में योगदान के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। आईएमएस-1 की तकनीक यू आर राव सैटेलाइट सेंटर का एक प्रोडक्ट है। इसे विशेष रूप से अंतरिक्ष में योगदान देने वाला कम लागत वाला छोटा सैटेलाइट प्लेटफॉर्म प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
IMS-1 पेलोड ले जाने में माहिर है। यह पृथ्वी, महासागर की इमेजिंग और वायुमंडल के अध्ययन और अंतरिक्ष विज्ञान मिशनों को सपोर्ट करता है। यह 30 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकता है। सोलर माध्यम से 330 W बिजली उत्पन्न कर सकता है। इसरो द्वारा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से भारतीय अंतरिक्ष उद्यमों के लिए प्राइवेट सेक्टर के नए तरक्की के द्वार खुलेगा। जिस एडीटीएल कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया गया है, वह इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, सिस्टम इंटीग्रेशन में अग्रणी स्थान रखता है।
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