Indian Railways में क्यों नहीं मिलता सैनिटरी पैड? महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल!

Published : Aug 24, 2025, 08:15 PM IST
Indian Railways sanitary pads

सार

"Why Indian Railways Lacks Sanitary Pads?" आधी रात के ट्रेन सफर में अचानक पीरियड्स... महिलाएं असहाय क्यों? क्या 2025 में भी ये बुनियादी सुविधा सपना ही रहेगी? ये सवाल हर महिला यात्री के मन में डर और नाराजगी के साथ गूंज रहा है!

Indian Railways Sanitary Pads Facility: भारतीय रेलवे में हर रोज़ लाखों यात्री सफर करते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड जैसी बुनियादी सुविधा आज भी उपलब्ध नहीं है। हाल ही में एक महिला यात्री का अनुभव इस बात का सबूत है कि पीरियड्स जैसी आपात स्थिति में महिलाएं किस तरह असहाय महसूस करती हैं।  यह एक ऐसा विषय जिसे 2025 में भी गंभीरता से चर्चा की जरूरत है। आधी रात के ट्रेन सफर में अचानक शुरू हुए पीरियड्स ने उस महिला को ऐसी परेशानी में डाल दिया, जिसे सोचकर भी सिहरन होती है। सवाल यह है कि जहां ट्रेन में पानी की बोतल, स्नैक्स और दवाइयां आसानी से मिल जाती हैं, वहां सैनिटरी पैड जैसी मेंस्ट्रुअल हाइजीन (Menstrual Hygiene) की जरूरी सुविधा क्यों नहीं है?

आधी रात का डरावना अनुभव: एक महिला यात्री की कहानी

एक महिला यात्री ने हाल ही में ट्रेन यात्रा के दौरान आधी रात को अचानक पीरियड्स आने की घटना साझा की। उनके पास सैनिटरी पैड नहीं था, और IRCTC स्टाफ से मदद मांगने पर उन्हें निराशाजनक जवाब मिला-"दुकान बंद हो चुकी है, सुबह ही मिलेगा।" सोचिए, इस आधुनिक दौर में भी महिलाएं ऐसी आपातकालीन स्थिति में बेसहारा रह जाती हैं। यह अनुभव एक दर्दनाक हकीकत को उजागर करता है-ट्रेन यात्रा में मेंस्ट्रुअल प्रोडक्टस की उपलब्धता (Menstrual Products Availability) अभी भी सपना है।

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क्यों नहीं है ट्रेन में सैनिटरी पैड की सुविधा?

भारतीय रेलवे में जहां खाना, पानी और दवाइयां आसानी से उपलब्ध कराई जाती हैं, वहां  सेनेटरी पैड (Sanitary Pads in Indian Railways) को कभी प्राथमिकता नहीं दी गई।

  • रेलवे स्टेशन पर कभी-कभार वेंडिंग मशीनें जरूर दिखती हैं, लेकिन ट्रेनों में इनका कोई इंतजाम नहीं।
  • आधी रात जैसी स्थिति में महिला यात्रियों को राहत देने का कोई प्रावधान नहीं है।
  • रेलवे अधिकारियों की सोच में यह मुद्दा अभी भी “अहम” सूची में नहीं है।

महिला सुरक्षा और सम्मान पर उठते सवाल

वुमेन ट्रवेल सेफ्टी इन इंडिया (Women Travel Safety in India) और मेंस्ट्रुअल हेल्थ अवेयरनेस (Menstrual Health Awareness) पर कई अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नदारद है।

  • क्या यह समय नहीं आ गया कि ट्रेन यात्राओं में भी पैड को पानी की बोतल जितना जरूरी माना जाए?
  • क्या 2025 में भी महिलाओं को इस बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?

अब बदलाव का समय: समाधान की ओर कदम

  • इस स्थिति को सुधारने के लिए रेलवे को कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए:
  • सभी ट्रेनों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन लगाई जाएं।
  • ऑनबोर्ड स्टाफ को आपातकालीन पैकेट्स उपलब्ध कराए जाएं।
  • टिकट बुकिंग के समय महिला यात्रियों को यह सुविधा बताई जाए।
  • स्टेशन और कोच में जागरूकता अभियान चलाया जाए।

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