
नई दिल्ली. अपनी सख्त छवी को लेकर विख्यात रिटायर्ड आईपीएस विजय कुमार को जम्मू कश्मीर का पहला उपराज्यपाल चुना गया है। उनके कामों को देखते हुए उन्हें ये जिम्मेदारी दी गई है। आईपीएस विजय कुमार कई बड़े ऑपरेशन को अंजाम दे चुके हैं। उन्होंने साल 2004 में तमिलनाडू के खुंखार डाकू को वीरप्पन को मार गिराया था। उन्हें दंतेवाड़ा में 2010 में हुए नक्सली हमले के बाद सीआरपीएफ का डीजी बनाकर भेजा गया था। जिसके बाद से इलाके में नक्सली गतिविधियों में कमी देखने को मिली थी। वर्तमान में वे राज्यपाल सत्यपाल मलिक के मुख्य सलाहकार हैं। उन्होंने वीरप्पन के खिलाफ चलाए ऑपरेशन पर 'चेजिंग द ब्रिगेड' नाम की किताब भी लिखी है। इस किताब में उन्होंने बताया था कैसे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था...
विजय कुमार की लिखी किताब के मुताबिक- 'तस्कर वीरप्पन तक पहुंचने के लिए तीन राज्यों की पुलिस और सेना को लंबा वक्त लगा था। उनके नेतृत्व में कोकून ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था। साल 2004 के अक्टूबर महीने में इस ऑपरेशन को कामयाबी मिली थी। विजयकुमार बताते हैं- 'वीरप्पन और उसके कुछ साथी एंबुलेंस में बैठकर आ रहे थे। जिसके बाद उन्हें घेर लिया गया। तस्करों को सरेंडर करने का पूरा मौका दिया था। लेकिन डाकूओं ने एक नहीं सुनी, जिसके बाद वहां मौजूद सुरक्षाबल को गोली चलानी पड़ी।'
सीक्रेट ऑपरेशन था
विजय कुमार के मुताबिकक- 'यह एक सीक्रेट ऑपरेशन था। एक सादे कपड़े में सब इंस्पेक्टर होटल के अंदर बैठा था। वीरप्पन की गाड़ी गुजरी तो उसने हमें इशारा किया। सुरक्षा के तहत ऑपरेशन के दौरान कोर्ड वर्ड भी रखे गए थे। जिसमें फॉग लैंप का मतलब चार लोग था। सब इंस्पेक्टर ने फॉग लैंप की तरफ इशारा करके एंबुलेंस में बैठे लोगों की जानाकारी दी थी। एक चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान आईपीएस विजय कुमार ने बताया- जब भी वो वीरप्पन के घटनाक्रम को याद करते हैं, तो ऐसा लगता है, जैसे कोई 5-6 मूवी देख ली हो। एक साथ कई जगह कई तरह की चीजें उस वक्त चल रही थी।
और किताब में क्या है
चेंजिंग द ब्रिगेड में वीरप्पन की तरफ से की कई निर्मम हत्याओं और हाई प्रोफाइल अपहरणों के बारे में बताया गया। इसमें कन्नड़ के सुपरस्टार राजकुमार को 108 दिन तक दी गई प्रताड़ना का जिक्र भी शामिल है।
विजयकुमार ने खाई थी शपथ
बताया जाता है कि विजयकुमार ने बन्नारी अम्मान मंदिर में कसम खाई थी। उन्होंने कहा था जब तक वीरप्पन को मार नहीं देते तबतक सिर के बाल नहीं मुंढवाएंगे। जिसके बाद 18 अक्टूबर 2004 को उन्होंने अपनी टीम के साथ तमिलनाडू के धरमपुरी जंगल में हुए एनकाउंटर में वीरप्पन को मार गिराया।
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