
नई दिल्ली। दिवाली पर दिल्ली को दहलाने की आतंकी साजिश को पुलिस ने नाकाम कर दिया है। शुक्रवार को पुलिस ने बताया कि दिल्ली से दो संदिग्ध ISIS के आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर साउथ दिल्ली के एक पॉपुलर मॉल, पब्लिक पार्क और घनी आबादी वाले इलाके में विस्फोट करने की तैयारी कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अदनान नाम के दोनों आतंकियों को दिल्ली और भोपाल में संयुक्त अभियान के बाद गिरफ्तार किया गया। उनमें से एक दिल्ली के सादिक नगर का रहने वाला है, जबकि दूसरा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का रहने वाला है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर (स्पेशल सेल) प्रमोद कुशवाहा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "इन गिरफ्तारियों ने दिल्ली में एक संभावित आतंकवादी हमले को टाल दिया है। इन आतंकियों ने साउथ दिल्ली के एक मॉल और पार्क सहित कई भीड़-भाड़ वाले इलाकों की रेकी की थी और यहीं पर हमले को अंजाम देने की प्लानिंग की थी।"
जांच में पता चला है कि ये आतंकवादी दिवाली के दौरान भीड़-भाड़ वाली जगहों को निशाना बनाने की फिराक में थे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारा जा सके। पुलिस ने आरोपियों के पास से ISIS से जुड़ा एक वीडियो और दिल्ली में संभावित टारगेट वाली जगहों की तस्वीरें बरामद की हैं। इसके अलावा एक टाइमर डिवाइस भी जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल धमाके की टाइमिंग के लिए किया जाता है।
पहले आतंकी अदनान को दिल्ली के सादिक नगर से 16 अक्टूबर को पकड़ा गया था। उससे पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर दूसरे अदनान को बाद में भोपाल से गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि भोपाल निवासी अदनान इससे पहले ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे को लेकर सोशल मीडिया पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के एक अधिकारी को कथित तौर पर धमकाने के बाद जांच के दायरे में आया था।
पुलिस ने बताया कि इन गिरफ्तारियों से कई राज्यों में एक्टिव ISIS से प्रेरित एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों संदिग्ध आतंकी "फिदायीन" यानी आत्मघाती हमलों की ट्रेनिंग ले रहे थे। उनके पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य आपत्तिजनक चीजों से पता चलता है कि दोनों विदेशी आकाओं के संपर्क में थे और आईईडी-बेस्ड हमले को अंजाम देने की फिराक में थे। बता दें कि ये अभियान खुफिया सूचनाओं पर आधारित था, जिसे अतिरिक्त आयुक्त प्रमोद कुशवाहा और एसीपी ललित मोहन नेगी के नेतृत्व वाली टीम ने संयुक्त रूप से चलाया।
स्पेशल सेल का मानना है कि दोनों को ऑनलाइन कट्टरपंथी बनाया गया था। हो सकता है कि उन्हें विदेश में मौजूद आकाओं से रसद सहायता मिली हो। जांच एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या दोनों ने दिल्ली या भोपाल में अन्य लोगों को भर्ती करने का प्रयास किया था। इसके अलावा इनके संबंध कहीं पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से तो नहीं हैं।
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