इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की उड़ान भरेंगे भारतीय एस्ट्रोनॉट, ISRO चीफ सोमनाथ ने की यह डिमांड

Published : Nov 29, 2023, 04:59 PM IST
DR. S. Somnath

सार

इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा कि भारतीय एस्ट्रोनॉट जल्द ही इंटरनेशनल स्पेस एजेंसी की उड़ान भरने वाले हैं। सोमनाथ ने कहा कि इससे पहले भारतीय एस्ट्रोनॉट को अमेरिकी फैसिलिटीज में ट्रेंड किया जाना चाहिए। 

ISRO Chief S Somnath. भारत को चंद्रयान 3 की ऐतिहासिक सफलता दिलाने वाले एस सोमनाथ ने कहा कि भारतीय एस्ट्रोनॉट इंटरनेशनल स्पेस एजेंसी से उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को अमेरिकी फैसिलिटीद में ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। हाल ही में नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेलसन ने कहा कि अमेरिकी यान से भारतीय एस्ट्रोनॉट इंटरनेशनल स्पेस एजेंसी की उड़ान भरेंगे। यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।

क्यों मिलनी चाहिए अमेरिकी में ट्रेनिंग

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अध्यक्ष एस सोमनाथ ने बुधवार को कहा कि नासा भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (एस्ट्रोनॉट) को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर भेजने की तैयारी कर रह है। हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जो बाइडेन के बीच हुई मीटिंग में इस पर चर्चा की गई थी। न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट को मानें तो सोमनाथ ने कहा कि नासा के अधिकारियों ने इस बात की घोषणा की है। इसरो प्रमुख ने कहा कि पूरा कार्यक्रम इस तरह से किया जाना चाहिए कि इससे भारत को लाभ हो। इसरो चाहता है कि भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों और एस्ट्रोनॉट मैनेजमेंट, ट्रीटमेंट और कंट्रोल टीमों को अमेरिकी सुविधाओं के तहत प्रशिक्षित किया जाए। इससे भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरने का अनुभव मिलेगा।

क्या है भारत और अमेरिकी का ज्वाइंट प्लान

नासा और इसरो 2024 की पहली तिमाही में नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (एनआईएसएआर) सैटेलाइट लांच करने वाले हैं। इससे पहले कई तरह की तैयारियां की जानी हैं। एनआईएसएआर को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वाहन (जीएसएलवी) द्वारा लॉन्च किया जाएगा। NISAR के काम करने की अवधि तीन वर्ष है। एनआईएसएआर धरती पर खोज करने वाला सैटेलाइट है। यह 12 दिनों में धरती की सभी भूमि, बर्फ से ढंकी सतहों की जांच करेगा और विश्लेषण के साथ सर्वे भी करेगा। यह सैटेलााइट करीब 90 दिनों तक चालू रहेगा। इसी दौरान पृथ्वी का फुल रिसर्च करेगा।

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