
बेंगलुरु। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO (इसरो) मिशन गगनयान से पहली बार इंसान को अंतरिक्ष में भेजने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में इस मिशन की घोषणा की थी। इसके बाद से चर्चा थी इसरो द्वारा किन अंतिरक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन अंतिरक्ष यात्रियों के नामों की घोषणा की है। इनके नाम ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालाकृष्णण नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णण, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला हैं।
इन सभी को बेंगलुरु स्थिति एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग केंद्र में ट्रेनिंग दी गई है। प्रधानमंत्री ने तिरुवनंतपुरम स्थित इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में इन चारों अंतरिक्ष यात्रियों का परिचय दुनिया को दिया। इस दौरान पीएम ने मीडिया के अपील की कि इन चारों अंतरिक्ष यात्रियों को अपने मिशन से न भटकाएं।
रूस भेजकर दिलाई गई अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग
अंतरिक्ष यात्रियों का चुनाव एयर फोर्स के टेस्ट पायलटों में से किया गया है। अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए बहुत से लोगों ने आवेदन दिया था। पहले 12 लोगों की लिस्ट बनाई गई। अब इनमें से 4 का चुनाव किया गया है। अंतरिक्ष यात्रियों का चुनाव इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (IAM) में किया गया। यह भारतीय वायु सेना के अंतर्गत आता है। इन चारों को 2020 की शुरुआत में ट्रेनिंग के लिए रूस भेजा गया था।
क्या है गगनयान मिशन?
गगनयान मिशन इसरो का पहला ऐसा स्पेस मिशन है जिसमें इंसान को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में भेजा जाएगा। वे तीन दिन अंतरिक्ष में रहेंगे। इसके बाद धरती पर लौट आएंगे। लैंडिंग समुद्र में कराई जाएगी। इसके लिए इसरो द्वारा इंसान को ले जाने लायक रॉकेट, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और चालक दल के लिए इमरजेंसी स्केप तैयार किए जा रहे हैं।
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मिशन गगनयान के सफल होने के बाद भारत अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाले चंद देशों में शामिल हो जाएगा। अभी तक यह कामयाबी, अमेरिका, रूस और चीन को मिली है।
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