
श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद (Jammu and Kashmir terrorism) के खिलाफ बीती रात एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। आतंकवाद और अलगाववाद से जुड़े अपराधों की जांच के लिए गठित राज्य जांच एजेंसी(State Investigation Agency-SIA) ने बीती रात दक्षिण और मध्य कश्मीर के विभिन्न जिलों में 10 अलग-अलग जगहों पर छापा मारा। यहां से 10 संदिग्धों को पकड़ा गया है। ये लोग आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद(JEM) के लिए काम करते थे।
आर्थिक मदद और हथियार मुहैया कराते थे
जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार गिरफ्तार 10 ओवरग्राउंड वर्कर्स(OGW) जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी कमांडर से दिशा-निर्देश लेते थे। ये लोग आतंकवादी संगठनों के लिए पैसा, हथियार और अन्य रसद मुहैया कराते थे।
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कुछ दिन पहले पकड़े गए थे तीन हैंडलर
कुछ दिन पहले ही हरियाणा (Haryana) की सोनीपत (sonipat) पुलिस ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (jaish-e-mohammed) के तीन हैंडलर को पकड़ा था। पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों में पति-पत्नी और उनका एक साथी शामिल है। आरोपी पति-पत्नी पंजाब के तरनतारन निवासी रवि और वरिंद्र दीप कौर और उसके साथी जालंधर के रहने वाले कणभ के रूप में हुई थी। तीनों फर्जी पासपोर्ट बनवाकर विदेश भागने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट जा रहे थे। आरोपी पाकिस्तान (Pakistan) में आतंकी संगठन के संपर्क में थे।
पुलवामा हमले में था जैश-ए-मोहम्मद का हाथ
14 फरवरी, 2019 को जम्मू-कश्मीर नेशनल हाईवे पर पुलवामा(Pulwama Attack) में हुए आतंकी हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ सामने आया था। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादियों के ठिकाने पर एयर स्ट्राइक की थी। इसमें 350 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर थी। कुछ समय तक यह आतंकवादी संगठन चुप बैठा रहा, अब कश्मीर के युवाओं को पैसों का लालच देकर अपने साथ मिला रहा है।
तालिबान के सत्ता में आने से सुरक्षा को खतरा
हाल में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा था कि अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) के सत्ता में आने से क्षेत्र के बाहर, विशेष रूप से अफ्रीका के कुछ हिस्सों में एक जटिल सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है। आतंकवाद विरोधी समिति के अध्यक्ष के रूप में अपनी उद्घाटन टिप्पणी देते हुए राजदूत टी.एस. तिरुमूर्ति ने कहा कि अगस्त 2021 में काबुल के तालिबान अधिग्रहण के साथ अफगानिस्तान में परिणामी परिवर्तन देखा गया। आतंकवाद विरोधी समिति की खुली ब्रीफिंग के दौरान टी.एस. तिरुमूर्ति ने कहा कि सुरक्षा परिषद को हाल ही में 1988 की समिति की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि तालिबान के संबंध बड़े पैमाने पर हक्कानी नेटवर्क के माध्यम अल-कायदा और विदेशी आतंकवादी लड़ाकों से घनिष्ठ बने हुए हैं। यह संबंध एक जैसे विचार, एक जैसे संघर्ष और अंतर्विवाह के माध्यम से बने संबंधों पर आधारित हैं।
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