जुवेनाइल जस्टिस संशोधन एक्ट: अब डीएम को बाल गृहों के रजिस्ट्रेशन, एडोप्शन केस का अधिकार, आप भी दीजिए सुझाव

Published : Oct 28, 2021, 04:31 PM IST
जुवेनाइल जस्टिस संशोधन एक्ट: अब डीएम को बाल गृहों के रजिस्ट्रेशन,  एडोप्शन केस का अधिकार, आप भी दीजिए सुझाव

सार

किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में संशोधन करने वाला किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 बीते 28 जुलाई 2021 को राज्यसभा में पास किया गया था। अब इस कानून के मसौदे पर लोगों को सुझाव मांगा गया है। 

नई दिल्ली। जुवेनाइल जस्टिस कानूनों (JJ Amendment bill 2021) के संशोधन के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of women and child development) ने सुझाव आमंत्रित किए हैं। मंत्रालय ने संशोधन का मसौदा तैयार करने के साथ अब उसमें संशोधन के लिए सुझाव मांगे है। किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 में संशोधन के मसौदे के लिए कोई भी 11 नवम्बर तक मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराई गई ई-मेल आईडी cw2section-mwcd@gov.in पर मेल कर सकता है। 

मानसून सत्र में राज्यसभा में पास किया गया था विधेयक

किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में संशोधन करने वाला किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 बीते 28 जुलाई 2021 को राज्यसभा में पास किया गया था। अब इस कानून के मसौदे पर लोगों को सुझाव मांगा गया है। 

इन प्राविधानों को संशोधन कर शामिल किया गया

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी (Smriti Irani)के अनुसार जुवेनाइल जस्टिस (Juvenile Justice) व्यवस्था में व्याप्त कमियों को दुरुस्त करते हुए कमजोर बच्चों की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को सौंपने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। उन्होंने संसद में इस प्रतिबद्धता को दोहराया था कि सभी मुद्दों से ऊपर उठकर भारत के बच्चों को प्राथमिकता देना होगा।

यह है प्रमुख संशोधन

नए संशोधनों में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सहित जिला मजिस्ट्रेट को जेजे अधिनियम की धारा 61 के तहत गोद लेने के आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। इससे मामलों का निपटारा तेजी से होगा और जवाबदेही भी बढ़ेगी। 

अधिनियम के तहत जिलाधिकारियों को इसके सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ संकट की स्थिति में बच्चों के पक्ष में समन्वित प्रयास करने के लिए और अधिक अधिकार दिए गए हैं। 

अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के अनुसार, किसी भी बाल देखभाल संस्थान को जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिशों पर विचार करने के बाद पंजीकृत किया जाएगा। 
डीएम स्वतंत्र रूप से जिला बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्डों, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों, बाल देखभाल संस्थानों आदि के कामकाज का मूल्यांकन करेंगे।

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