
नई दिल्ली. असम में ऐतिहासिक कार्बी आंलगोंग समझौते (Karbi Anglong Agreement) पर साइन हुए हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में यह करार हुआ है। अमितत शाह ने समझौते के बाद कहा यह एक ऐतिहासिक समझौता है। अमित शाह ने कहा- मैं पांच संगठनों और असम के मुख्यमंत्री के प्रतिनिधियों को आश्वासन देता हूं कि हम कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त करते हुए, निर्धारित समय सीमा के भीतर समझौते में निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करेंगे।
उन्होंने कहा- बोडोलैंड समझौता हो, ब्रू समझौता या एनएलएफटी समझौता, सरकार ने 80% से अधिक शर्तों को पूरा किया है। बोडोलैंड समझौते में लगभग सभी शर्तें पूरी की गई हैं। वहीं, समझौत के बाद असम के सीएम ने कहा- इस समझौते के तहत 1,000 आतंकवादी आत्मसमर्पण करेंगे और ढेर सारे हथियार जमा किए जाएंगे। शांति बहाल होगी। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
क्या है कार्बी
कार्बी असम का एक प्रमुख जातीय समूह है। जो कई गुटों और टुकड़ों से घिरा हुआ है। कार्बी समूह का इतिहास 1980 के दशक के उत्तरार्ध से हत्याओं, जातीय हिंसा, अपहरण से जुड़ा रहा है। असम और केंद्र की बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार ने नई दिल्ली में कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) क्षेत्र के अंदर सक्रिय कम से कम छह विद्रोही समूहों के साथ कार्बी आंगलोंग समझौते पर मुहर लगा दी। इस दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और छह संगठनों के नेता इस समझौते पर हस्ताक्षर के समय मौजूद रहे।
समझौते की मुख्य विशेषताएं:
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