
Karnataka Assembly Election 2023: कर्नाटक में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए शह मात का खेल शुरू हो चुका है। टिकट न मिलने से नाराज नेताओं को मनाने का दौर अपनी शबाब पर है। बीजेपी में नाराज नेताओं को मनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व लगा हुआ है। शुक्रवार को बीजेपी के सीनियर लीडर पूर्व उप मुख्यमंत्री केएस ईश्वरप्पा को पीएम मोदी ने कॉल कर उनसे बातचीत की। ईश्वरप्पा को इस बार बीजेपी ने टिकट नहीं दिया है। खुद का टिकट कटने और घोषित प्रत्याशी के जेडीएस में शामिल होने के बाद वह अपने परिवार से किसी को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग कर रहे थे लेकिन बीजेपी ने दूसरे प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है।
ईश्वरप्पा को पीएम मोदी ने किया धन्यवाद, उनकी सेवा को सराहा
पीएम मोदी ने केएस ईश्वरप्पा को पार्टी का फैसला स्वीकार करने के लिए धन्यवाद दिया। मध्य कर्नाटक के शिवमोग्गा सीट से पांच बार विधायक रहे ईश्वरप्पा से पीएम मोदी ने पार्टी के प्रति उनकी वफादारी और प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। एक वीडियो में ईश्वरप्पा को प्रधानमंत्री को यह कहते सुना जा सकता है, "यह बहुत अच्छा लगता है कि आप जैसा नेता मेरे जैसे एक साधारण कार्यकर्ता को बुला रहा है।"
पीएम मोदी ने कहा, "आपने पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। मैं आपसे बहुत खुश हूं। इसलिए मैंने आपसे बात करने का फैसला किया।" पीएम मोदी को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है कि वह अगली बार जब भी कर्नाटक आएंगे तो उनसे मिलेंगे। उन्होंने पीएम मोदी को आश्वासन दिया कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार, शिवमोग्गा नगर निगम में सत्ताधारी पार्टी के स्थानीय नेता चन्नबसप्पा के लिए प्रचार करेंगे। पूर्व मंत्री ने कहा, "मैं यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा कि कर्नाटक में भाजपा की जीत हो।"
बीजेपी ने अपने पुराने और अचूक फार्मूले को कर्नाटक में भी किया है लागू
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी जहां भी सत्ता में रही है, वहां होने वाले विधानसभा या किसी भी चुनाव में भारी संख्या में सीटिंग विधायकों का टिकट काट देती है। इससे लोगों का आक्रोश कम होता है और पीएम मोदी का चेहरा सामने लाकर वह चुनाव आसानी से जीत जाती है। कर्नाटक चुनाव में भी पार्टी ने इसी फार्मूले पर काम किया है। हालांकि, कर्नाटक में 10 मई को होने वाले चुनाव को 13 मई को नतीजों के साथ अगले साल होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले पीएम मोदी की लोकप्रियता के परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा ने इस बार कई नए चेहरों और युवा नेताओं को मैदान में उतारा है। जबकि कुछ क्षेत्रों में जनाक्रोश की वजह से कई दिग्गजों और पदाधिकारियों को हटा दिया है। लेकिन उनमें से कुछ ने पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी है और प्रतिद्वंद्वी पार्टियों में शामिल हो गए हैं या निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है।
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