
नई दिल्ली. कर्नाटक में बाढ़ के दौरान 12 साल के एक बच्चे ने एंबुलेंस को रास्ता दिखाया था। उस वक्त चारों तरफ पानी भरा था, लेकिन इस बच्चे ने बहादुरी दिखाते हुए रास्ता दिखाया और हीरो बन गया। अब वेंकटेश को उन 22 बच्चों में चुना गया है, जिन्हें राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए 26 जनवरी को नई दिल्ली में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
अगस्त में आई थी बाढ़
कर्नाटक के रायचूर जिले में पिछले साल अगस्त में बाढ़ आई थी। तब 6वीं क्लास में पढ़ने वाले वेंकटेश ने एक एंबुलेंस को देखा। फिर अपनी जान जोखिम में डालकर उस एंबुलेंस को रास्ता दिखाया था।
एंबुलेंस में 6 बच्चे सहित एक मृत महिला का शव था
इस बहादुर बच्चे ने जिस एंबुलेंस को रास्ता दिखाया था, उसमें उस वक्त 6 बच्चों सहित एक मृत महिला का शव पड़ा था।
बच्चे की तारीफ इस बात पर हुई कि उस वक्त पुल पर पानी की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल था। उस वक्त भी वेंकटेश ने अपनी जान जोखिम में डालकर एंबुलेस को बाहर निकवाया।
'मुझे नहीं पता था कि वह बहादुरी का काम था'
जब वेंकटेश का वीडियो वायरल हुआ था तो वेंकटेश से पूछा गया कि उन्होंने ऐसा कैसे किया। तब वेंकटेश ने कहा था कि मुझे नहीं पता यह बहादुरी का काम था या नहीं। मैं बस एंबुलेंस ड्राइवर की मदद करना चाहता था।
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