कर्नाटक बस हादसे में बचे यात्रियों की दिल दहलाने वाली कहानी, देखें घटना की 6 PHOTOS

Published : Dec 26, 2025, 08:55 AM IST
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सार

Karnataka Bus Accident: कर्नाटक बस हादसा! आग और ठंड में फंसे यात्री कैसे बच पाए? एम्बुलेंस देर से पहुंची, स्थानीय लोगों ने निभाई जीवन रक्षक भूमिका। हादसे में 6 की मौत, 28 घायल। पूरा दर्दनाक अनुभव यहां पढ़ें।

Karnataka Bus Accident 2025: गुरुवार तड़के कर्नाटक के हिरियूर के पास एक ट्रक और बस की भयानक टक्कर ने यात्रियों की जिंदगी को दहशत में बदल दिया। बस में लगी आग और अचानक आई घनी धुंध ने यात्रियों को ऐसे हालात में डाल दिया कि कुछ सेकंड में उनकी नींद मौत में बदल गई। बस के अंदर सो रहे अधिकांश लोग अचानक जाग गए और देखा कि उनकी बस आग में जल रही है। हेमराज ने बताया, "हम सो रहे थे। अचानक मेरे सिर पर कुछ गिरा, और चारों ओर अंधेरा और धुआं। मैंने तुरंत अपने बेटे को खिड़की से बाहर धकेला, फिर मेरी पत्नी भी कूद गई। आग बहुत तेज थी। बस के पीछे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन हमारे पास बस से बाहर निकलने के अलावा कोई चारा नहीं था।"

क्या आग से बचना ही मुश्किल था?

स्लीपर कोच में तीन यात्री गंभीर जलने से बच पाए, जबकि 25 अन्य को मामूली चोटें आई। बस में अचानक घना धुआं भर जाने के कारण कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई। कई यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर खुद को बाहर निकाला, लेकिन इससे चोटें भी लगी।

एम्बुलेंस देर क्यों हुई?

बचे हुए यात्रियों ने बताया कि इमरजेंसी नंबर पर बार-बार कॉल करने के बावजूद पहली एम्बुलेंस लगभग डेढ़ घंटे बाद ही पहुंची। दो और एम्बुलेंस सुबह 3.40 बजे से 4 बजे के बीच मिलीं। टेकनीशियन वरुण ने बताया, "हम ठंड में कांप रहे थे, जलने और फ्रैक्चर की चोटें थीं, लेकिन कोई मदद नहीं आई।" मंजूनाथ एम, जो लगभग 70% जल चुके थे, अस्पताल पहुँचने के इंतजार में डर और दर्द से गुज़रते रहे। कई यात्रियों ने कहा कि अग्निशमन कर्मी 20 मिनट में आए, लेकिन मेडिकल मदद बहुत देर से मिली।

स्थानीय लोगों ने कैसे बचाई जिंदगी?

स्थानीय लोग सबसे पहले मदद के लिए पहुंचे। प्राइवेट ड्राइवर ऋतिक कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्तों को बुलाया और फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर यात्रियों को बाहर निकाला। जब एम्बुलेंस आई, तब स्थानीय लोग घायलों को हिरियूर और शिरा सरकारी अस्पताल तक पहुँचाने में मदद कर रहे थे।

क्या ट्रैफिक ने भी देरी बढ़ाई?

एम्बुलेंस ड्राइवरों ने बताया कि हाईवे पर भारी ट्रैफिक जाम की वजह से मदद देर से पहुंची। दुर्घटना के बाद गाड़ियों की आवाजाही रुक गई थी और ट्रैफिक लगभग 3 किलोमीटर तक फैला हुआ था।

क्या यह बस हादसा समय पर मेडिकल मदद न मिलने की मिसाल है?

यह हादसा न केवल आग और ठंड की मार दिखाता है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं में देरी की भी गंभीर तस्वीर पेश करता है। अगर ट्रैफिक और आपातकालीन प्रतिक्रिया बेहतर होती, तो शायद 6 यात्रियों की जान बच सकती थी।

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