
बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 (Karnataka Assembly Election 2023) के लिए प्रचार अभियान चरम पर है। 10 मई को 5,21,73,579 मतदाता अपनी सरकार चुनने के लिए वोट देंगे। कर्नाटक में पिछले एक महीने में जोरदार चुनाव प्रचार हुआ है। इस दौरान कई विवादित बयान दिए गए और जनता से वादे भी किए गए। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि कौन जीतेगा?
एशियानेट न्यूज नेटवर्क द्वारा कमीशन और जन की बात द्वारा संचालित ओपिनियन पोल (Jan ki Baat Karnataka Opinion Poll) में सामने आया कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। 15 अप्रैल से 1 मई के बीच किए गए सर्वे के अनुसार बीजेपी को 100-114 सीटें मिलने की उम्मीद है। उसके बाद कांग्रेस को 86-98 सीटें और जनता दल सेक्युलर (JDS) को 20-26 सीटें मिल सकती हैं। सर्वे से पता चला है कि कर्नाटक में भाजपा का जनाधार बढ़ रहा है। वहीं, JDS की ताकत कम हो रही है।
एशियानेट न्यूज नेटवर्क द्वारा 15 मार्च से 11 अप्रैल के बीच इसी तरह का एक सर्वे किया गया था। इसमें दिखाया गया था कि भाजपा को 98-109, कांग्रेस को 89-97 और JDS को 25-29 सीटें मिल सकती हैं। चुनाव प्रचार आगे बढ़ने के साथ ही भाजपा का जनाधार बढ़ता दिख रहा है। वहीं, JDS को नुकसान होता दिख रहा है।
पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयानों से कांग्रेस को हो रहा नुकसान
पिछले कुछ दिनों में कांग्रेसी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विवादित बयान दिए हैं। इससे कांग्रेस को नुकसान होता दिख रहा है। पीएम कर्नाटक में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस द्वारा अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल पर बैन लगाने के मुद्दे को उठाया है और कहा है कि ये लोग बजरंग बली को ताले में बंद करना चाहते हैं।
घट रहा जनता दल (सेक्युलर) का जनाधार
एशियानेट न्यूज नेटवर्क के सर्वे में दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि भाजपा का वोट शेयर बढ़ रहा है, लेकिन पार्टी कांग्रेस के वोट-बैंक में सेंध नहीं लगा रही है। जनता दल (सेक्युलर) का जनाधार घट रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की जनता दल (सेक्युलर) को मार्च-अप्रैल के सर्वे में 16-18 प्रतिशत वोट मिलता दिखाया गया था।
अप्रैल-मई के सर्वे में पार्टी के वोट शेयर में करीब दो फीसद की कमी (14%-16.5%) दिखाया गया है। भाजपा को 38-40.5% और कांग्रेस को 38.5-41.5% वोट मिल सकते हैं। मार्च-अप्रैल में किए गए सर्वे में पता चला था कि भाजपा को 37-39% और कांग्रेस 38-40% वोट मिल सकते हैं। यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस अधिक वोट शेयर लाकर भी कम सीटों पर सिमट सकती है। 2018 में कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में 36.22% वोट पाने वाली भाजपा को 104 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, 38.04% वोट लाकर भी कांग्रेस को 78 सीटें मिली थीं।
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