
बेंगलुरु। पूर्व विदेश मंत्री और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सोमनहल्ली मल्लैया कृष्णा नहीं रहे। मंगलवार को 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। कृष्णा 2009 से 2012 तक भारत के विदेश मंत्री थे। उन्होंने भारत की विदेश नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लंबी बीमारी के बाद बेंगलुरु में अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एसएम कृष्णा के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने X पर पोस्ट किया, "केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में कृष्णा की सेवा अद्वितीय है। आईटी-बीटी क्षेत्र के विकास में उनके योगदान के लिए कर्नाटक हमेशा उनका ऋणी रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में शानदार काम किया था। कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के शुरुआती दिनों में कृष्णा मेरे मार्गदर्शक रहे। वह हमेशा मेरे शुभचिंतक रहे। कृष्ण की दूरदर्शिता, अनुशासित जीवन, सज्जनतापूर्ण व्यवहार और अध्ययनशील रवैया उभरते राजनेताओं के लिए आदर्श हैं। मैं उनके परिवार और प्रशंसकों के दुख में शामिल हूं। ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले।"
कृष्णा 1999 से 2004 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे। उन्हें बेंगलुरु को भारत के टेक्नोलॉजी केंद्र में बदलने का श्रेय दिया जाता है। इससे शहर को "भारत की सिलिकॉन वैली" की उपाधि मिली। कृष्णा 2009 से 2012 तक केंद्रीय विदेश मंत्री थे। वह 2004 से 2008 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे।
एसएम कृष्णा ने अपना राजनीतिक करियर 1960 के दशक में शुरू किया था। वह 1962 में मद्दुर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े और कांग्रेस उम्मीदवार को हराया था। बाद में वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए। कृष्णा ने 1968 में उपचुनाव में मांड्या लोकसभा सीट जीती। वह 1971 में कांग्रेस में वापस आए और उसी लोकसभा सीट से दोबारा जीते। 1985 में कृष्णा कर्नाटक की राजनीति में वापस आए। वह 1999 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने। इस पद पर 2004 तक रहे। 2017 में कृष्णा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। 2023 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
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