कर्नाटक सरकार ने पीछे खींचे कदम, स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण वाला विधेयक रोका

Published : Jul 17, 2024, 08:56 PM ISTUpdated : Jul 17, 2024, 09:23 PM IST
Siddaramaiah

सार

भारी विरोध के चलते कर्नाटक सरकार ने प्राइवेट कंपनियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण संबंधी विधेयक रोक दिया है। इसे गुरुवार को विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना थी। 

बेंगलुरु। प्राइवेट नौकरियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण संबंधी विधेयक कर्नाटक सरकार ने रोक दिया है। भारी विरोध के चलते राज्य सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। इससे पहले कर्नाटक मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दी थी। इसमें निजी क्षेत्र में 50 प्रतिशत प्रबंधन पदों और 75 प्रतिशत गैर-प्रबंधन पदों पर कन्नड़ लोगों की नियुक्ति का प्रस्ताव है।

उद्योग जगत के भारी विरोध के चलते कर्नाटक सरकार को लेना पड़ा फैसला

कर्नाटक सरकार को उद्योग जगत के भारी विरोध के चलते यह फैसला लेना पड़ा है। विधेयक में निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण अनिवार्य किया गया था। उद्योग जगत का कहना था कि इससे राज्य में काम करना मुश्किल हो जाएगा। अब सरकार ने कहा है कि विधानसभा में पेश करने से पहले इस विधेयक पर फिर से विचार करेगी।

गुरुवार को विधानसभा में पेश किया जाना था विधेयक

पहले कर्नाटक राज्य उद्योग, कारखानों और अन्य प्रतिष्ठानों में स्थानीय उम्मीदवारों को रोजगार विधेयक, 2024 को गुरुवार को विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने मंत्रियों के साथ कैबिनेट बैठक में विधेयक को पास किया था। अपनी सरकार को "कन्नड़ समर्थक" बताया था। सीएम ने कहा था कि उनकी प्राथमिकता "कन्नड़ लोगों के कल्याण का ध्यान रखना" है।

आईटी उद्योग ने कहा था- विधेयक से बेंगलुरु में टेक इंडस्ट्री का विकास होगा बाधित

बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है। पूरे देश से आई पेशेवर यहां आते हैं। यहां आईटी उद्योग अच्छी तरह फल-फूल रहा है। प्राइवेट कंपनियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण अनिवार्य करने वाला विधेयक लाए जाने पर आईटी उद्योग ने कड़ी आलोचना की। कहा कि इस तरह के विधेयक से बेंगलुरु में टेक इंडस्ट्री का विकास बाधित होगा, इससे नौकरियों पर असर पड़ेगा।

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नैसकॉम ने कहा- विधेयक पास हुआ तो चली जाएंगी कंपनियां

सॉफ्टवेयर बॉडी नैसकॉम ने विज्ञप्ति जारी कर कहा, "नैसकॉम के सदस्य इस विधेयक के प्रावधानों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। हम राज्य सरकार से विधेयक वापस लेने का आग्रह करते हैं। विधेयक के प्रावधान ऐसे हैं कि टेक कंपनियों को नुकसान होगा। उनकी ग्रोथ रुक जाएगी। इससे कंपनियों के दूसर राज्यों में चले जाने और स्टार्टअप्स के लिए माहौल खराब होने का खतरा है। ऐसा तब होगा जब बहुत सी ग्लोबल कंपनियां कर्नाटक में निवेश करना चाह रही हैं।"

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