
नई दिल्ली. सुनीता कृष्णन एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता, मुख्य कार्यवाहक और प्रज्वला की सह संस्थापक है। इन दिनों इनका नाम काफी चर्चा में है। दरअसल, कौन बनेगा करोड़पति के सीजन-11 में सुनीता कृष्णन शुक्रवार को प्रसारित होने वाले स्पेशल एपिसोड कर्मवीर में शिरकत करेंगी। इस एपिसोड का प्रसारण आज यानी 18 अक्टूबर को होगा। सुनीता ने महिलाओं और बच्चियों को यौन तस्करी से मुक्त किया है। सुनीता ने अपने संघर्ष की कहानी कार्यक्रम के होस्ट अमिताभ बच्चन को बताई तो वो भी दंग रह गए। सुनीता कृष्णन ने बताया कि जब वह सिर्फ 15 साल की थीं तो उनके साथ 8 लोगों ने बालात्कार किया था।
कर्मवीर स्पेशल का प्रोमो भी सामने आ चुका है। प्रोमो में अमिताभ बच्चन ने बताया कि सुनीता कृष्णन ने 22 हजार से ज्यादा महिला और बच्चियों को यौन तस्करी से मुक्त करवाया है। सुनीता ने बताया कि उन्होंने साढ़े तीन साल की बच्ची को भी वेश्यावृति से मुक्त करवाया है, ये बात सुनकर अमिताभ बच्चन भी दंग रह जाते हैं। कृष्णन ने बताया कि उनके ऊपर 17 बार हमले हुए हैं।
8 साल की उम्र से ही है सामाजिक कार्य करने का जुनून
कृष्णन का जन्म बुन्ग्लुरु के पालक्कड़ मलयाली माता पिता, राजा कृष्णन और नलिनी कृष्णन के घर हुआ था। एक जगह से दूसरी जगह यात्रा कर कर के वह भारत का अधिकांश हिस्सा देख चुकी थी। उनके पिता सर्वे विभाग में काम करते थे जो पूरे देश के लिए नक्शे बनाते है। उनके अंदर सामाजिक कार्य के लिए जूनून तभी से आ गया था। जब उन्होंने 8 साल की उम्र से मानसिक रूप से चुनोतिपूर्ण बच्चो को डांस सीखना शुरू किया। 12 साल की उम्र में आयु में वह वंचित बच्चो के लिए स्कूल चलती थी। 15 वर्ष की उम्र में एक अभियान में काम करते हुए उन्हें रेप का सामना करना पड़ा। बता दें कि कृष्णन ने भूटान और बंगलौर के केंद्र स्कूलों में शिक्षा प्राप्त की। बंगलोर में सेंट जोसफ कॉलेज से पर्यवरण विज्ञान में स्नातक करके उन्होंने मंगलोर से एमएसदुब्लू (चिकित्सा और मनोरोग) की शिक्षा पूरी की।
खाली वेश्यालय में एक स्कूल शुरू किया
1996 में हैदराबाद के रेड लाइट एरिया के महबूब गली में रहने वाले सेक्स वर्कर्स को हटा दिया गया था। इसका नतीजा यह हुआ कि हजारों महिलाएं बेघर हो गईं थी। एक मिशनरी में सामान विचारधारा वाले व्यक्ति से मिल के, दूसरी पीढ़ी को तस्करी होने से रोकने से बचने के लिए उन्होंने खाली वेश्यालय में एक स्कूल शुरू किया। आज प्रज्वला 5 स्तंभों पर आधारित है- रोकथाम, बचाव, पुनर्वास, पुनर्मिलन और वकालत। संघठन पीड़ितों के लिए नैतिक, वित्तीय, कानूनी और सामाजिक समर्थन प्राप्त करता है और यह सुनिशिचित करता है कि अपराधियों को न्याय के लिए लाया जाये। आज तक प्रज्वला ने 12 हजार से अधिक जीवीत बचे लोगो को बचाया, पुनर्वास और सेवा की हैं और परिचालन के पैमाने पे उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा एंटी-ट्रैफिकिंग आश्रय बना दिया हैं। उन्होंने बताया कि इतना नेक काम करने के बाद भी उनको अपमान का सामना करना पड़ा।
पदमश्री से सम्मानित है कृष्णन
सुनीता जिस संगठन में संस्थापक हैं वह एक गैर सरकारी संघठन है जो यौन उत्पीड़न पीड़ितों को समाज में बचाते है, पुनर्वास कराते और पुनर्गठन करते हैं। कृष्णन मानव तस्करी और सामाजिक नीति के क्षेत्र में काम करती हैं। उनकी संस्था, प्रज्वला देश के सबसे बड़े पुनर्वास घरो में से एक वहां बच्चों और महिलाओं को आश्रय दिया जाता है। वह एनजीओ संस्थानों की मदद से कोशिश कर रहीं हैं के सयुक्त रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षात्मक और पुनर्वास सेवाएं दे सकें। उन्हें 2016 में भारत के चौथे उच्चतम नागरिक पुरुस्कार- पदमश्री से नवाज़ा गया।
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