
तिरुवनन्तपुरम(Thiruvananthapuram). केरल में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान(Governor of Kerala, Arif Mohammad Khan) और LDF सरकार के बीच तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है। इस बार राज्यपाल के निशाने पर फाइनेंस मिनिस्टर केएन बालागोपाल(K N Balagopa) निशाने पर आए हैं। गवर्नर ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन( Chief Minister Pinarayi Vijayan) को एक पत्र लिखकर बालागोपाल को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाने की बात कही है। दरअसल, यह मामला राज्य की यूनिवर्सिटी को लेकर चल रहे विवाद में बालागोपाल के बयान के बाद तूल पकड़ा है।
पढ़िए राज्यपाल ने क्या लिखा?
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि वित्तमंत्री केएन बालागोपाल सम्मान खो चुके हैं, इसलिए उन्हें पद से हटा दिया जाए। राज्यपाल ने मंत्री के एक भाषण पर आपत्ति जताई है। इससे पहले केएन बालगोपाल ने कहा कि कुछ समूहों के पास राज्य के विश्वविद्यालयों के बारे में गलत विचार थे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वे कौन थे? इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शनिवार(22 अक्टूबर) को कहा कि यह बयान उनकी अज्ञानता को प्रदर्शित करता है। खान ने कहा कि वह यह तय करने के लिए मुख्यमंत्री के विवेक पर छोड़ देंगे कि मंत्री को कैबिनेट से हटाया जाए या नहीं?
25 अक्टूबर को लिखे लेटर में राज्यपाल ने कहा कि सीएम का ध्यान 19 अक्टूबर, 2022 को पब्लिश खबरों की ओर दिलाना चाहते हैं। ये खबरें साफतौर पर उन्हें कलंकित करने का प्रयास हैं। राज्यपाल की छवि और पद की गरिमा को कम करना। राज्यपाल ने केएन बालागोपाल का जिक्र करते हुए कहा कि सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात फाइनेंस मिनिस्टर ने की थी। केएन बालागोपाल क्षेत्रवाद और प्रांतवाद की आग भड़काना चाहते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने इन आरोपों का खंडन किया है। CM ने कहा कि केरल राज्य के मंत्रिपरिषद के सदस्य केएन बालगोपाल पर मेरा ट्रस्ट और कॉन्फिडेंस है। वित्त विभाग का प्रभार अभी राज्यपाल के कारणों से कम नहीं हुआ है। मुझे आशा है कि राज्यपाल इस बात की सराहना करेंगे कि आगे मामले में कार्रवाई करने की कोई जरूरत नहीं है।
भाकपा और विपक्ष ने दिया ये जवाब
भाकपा के राज्य सचिव कनम राजेंद्रन ने जवाब दिया कि पत्र भेजने के लिए डाकघर होता है, इसलिए कोई भी पत्र भेज सकता है। राज्यपाल को नहीं पता कि उनका अपना अधिकार क्या है? राज्यपाल के पास मंत्रियों को हटाने का अधिकार नहीं है। सदन का मुखिया होता है मुख्यमंत्री। उन्होंने कहा कि राज्यपाल संविधान को को ही चुनौती दे रहे हैं।
विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने कहा कि राज्यपाल के पास मंत्रियों को वापस लेने की कोई शक्ति नहीं है। यह एक छद्म लड़ाई है। विश्वविद्यालय के मुद्दे पर सरकार और राज्यपाल एक स्टैंड ले रहे हैं। यह कदम कई मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए है। सरकार के खिलाफ यौन आरोप और पुलिस की बर्बरता जैसे मुद्दे हैं। दुनिया में पहले कहां राज्यपाल ने दिया है ऐसा पत्र? उन्होंने कहा कि वे लोगों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं।
जानिए यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद
पिछले दिनों केरल के गर्वनर ने ट्वीट कर 9 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का इस्तीफा मांग लिया था। इन सभी के VC को 24 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे तक अपना इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया गया था। हालांकि मामला केरल हाईकोर्ट में चला गया और केरल हाईकोर्ट ने कहा कि राज्यपाल का फाइनल आदेश आने तक कुलपति अपने पद पर बने रह सकते हैं। कुलपतियों ने हाईकोर्ट में राज्यपाल के आदेश को चैलेंज किया था। क्लिक करके पढ़ें परी डिटेल्स
हुआ यूं था कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में डॉ. राजश्री एमएस की नियुक्ति को रद्द कर दिया था। UGC के मुताबिक VC के पद के लिए तीन योग्य लोगों के एक पैनल की सिफारिश राज्यपाल को भेजी जानी थी। VC की नियुक्त रद्द होने के बाद नवंबर में राज्यपाल के खिलाफ सत्तारूढ़ LDF ने विरोध प्रदर्शन किए थे। इसके बाद राज्यपाल ने सभी 9 VC से रिजाइन मांग लिया था। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा यानी LDF ने 15 नवंबर को राज्यपाल के खिलाफ विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। माकपा के राज्य सचिव एमवी गोविंदन और भाकपा के राज्य सचिव कनम राजेंद्रन का आरोप है कि राज्यपाल अपने चांसलर पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। वे आरएसएस के एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।
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