
तिरुवनंतपुरम। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammed Khan) शनिवार को त्रिशूर जिले में स्थित प्रसिद्ध गुरुवायूर मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर परिसर में तुलाभारम भेंट किया।
राज्यपाल गुरुवायूर मंदिर में आयोजित होने वाले गुरुवायूर साहित्य महोत्सव का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस महोत्सव का आयोजन मदंपु कुंजुकुट्टन सुहृथ समिति द्वारा किया गया है। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्रसिद्ध लेखक और निर्देशक सी.राधाकृष्णन को मैडम्पस्मृति पुरस्कारम प्रदान किया।
मंदिर को दान देने की पद्धति है तुलाभारम
आरिफ मोहम्मद खान ने मंदिर के दर्शन किए और एक तुलाभरम भी भेंट किया। दरअसल, तुलाभारम मंदिर को दान देने की एक प्राचीन पद्धति है। इसमें दान करने वाला व्यक्ति अपने वजन के बराबर सामान मंदिर को भेंट करता है। दानदाता अपने सामर्थ के अनुसार दान के सामान का चुनाव कर सकता है। श्रद्धालु, नारियल और केला जैसे फल से लेकर अनाज और कीमती धातु तक का दान कर सकते हैं।
5000 साल पुराना है गुरुवायुर मंदिर
गौरतलब है कि गुरुवायुर मंदिर करीब 5000 साल पुराना है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है। इसे दक्षिण की द्वारका भी कहा जाता है। चार साल पहले प्रधानमंत्री इस मंदिर में पहुंचे थे और अपने वजन के बराबर कमल के फूल भगवान को अर्पित किए थे।
मंदिर को कहा जाता है धरती पर वैकुण्ठ लोक
गुरुवायुर मंदिर में भगवान कृष्ण की चार हाथों वाली मूर्ति है। भगवान कृष्ण एक हाथ में शंख, दूसरे हाथ में सुदर्शन चक्र, तीसरे हाथ में पुष्प और चौथे हाथ में गदा लिए हुए हैं। इस मंदिर को धरती पर वैकुण्ठ लोक भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था। मंदिर इस तरह बनाया गया है कि सूर्य की प्रथम किरणें सीधे भगवान गुरुवायुर के चरणों पर गिरें। 1638 में इस मंदिर के कुछ हिस्से का पुनर्निमाण किया गया था। यह केरल के प्रमुख धर्मस्थलों में से एक है।
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