
कोट्टयम। बहु चर्चित केरल नन रेप केस (Nun Rape Case) में आज कोर्ट फैसला सुना सकता है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय एक के न्यायाधीश जी गोपाकुमार की अदालत में इस केस की सुनवाई पूरी हो गई है। आज 11 बजे के बाद जज जी गोपाकुमार अपना फैसला सुना सकते हैं। इस मामले में जालंधर के पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल आरोपी हैं।
मामले में अभियोजन पक्ष के 39 और बचाव पक्ष के छह गवाह थे। अभियोजन पक्ष ने 122 दस्तावेज जमा किए, जबकि बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष 56 दस्तावेज जमा किए थे। अदालत ने एक आदेश के माध्यम से मीडिया को मुकदमे की बंद कमरे में होने वाली कार्यवाही को कवर करने से रोक दिया था। मामले में 9 अप्रैल, 2019 को चार्जशीट दायर की गई थी। मुलक्कल पर इस मामले में गलत तरीके से बंधक बनाने, बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध और आपराधिक धमकी देने के आरोप लगे हैं।
यह है मामला
28 जून 2018 को कुराविलंगड़ थाने में रेप पीड़िता का बयान दर्ज किए जाने के बाद फ्रेंको मुलक्कल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पीड़िता नन ने आरोप लगाया था कि बिशप ने 2014 से 2016 के बीच कई बार उनके साथ रेप किया था। मामला तूल पकड़ने के बाद बिशप ने अपने बचाव में कई तर्क दिए थे। उन्होंने यहां तक कहा कि उनसे बदला लेने के लिए यह शिकायत की गई है। बिशप ने नन के खिलाफ जांच करने की भी अनुमति मांगी थी।
ननों के विरोध प्रदर्शन के बाद हुई थी गिरफ्तारी
मामले में मुश्किलें बढ़ती देख मुलक्कल ने एक सर्कुलर जारी कर प्रशासनिक दायित्व दूसरे पादरी को सौंप दिया था। वैटिकन ने भी उनको पदमुक्त कर दिया था। आरोपी की गिरफ्तारी की मांग के लिए कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस मामले में पुलिस की धीमी जांच ने 8 सितंबर 2018 के बाद तेजी पकड़ी थी, जब 5 ननों ने गिरफ्तारी की मांग को लेकर कोच्चि में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इस प्रदर्शन को बड़े पैमाने पर जनसमर्थन मिला था और सेव सिस्टर्स ऐक्शन काउंसिल के नाम से नया संगठन खड़ा हो गया था। अनशन कर रही पीड़िता की एक बहन को उसकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आरोपी फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ गवाही देने वाले केस के प्रमुख गवाह फादर कुरियाकोस कट्टूथारा की 22 अक्टूबर 2018 को संदिग्ध स्थित में मौत हो गई थी। वह जालंधर में मृत पाए गए थे। 60 वर्षीय फादर कुरियाकोस ने नन रेप मामले में आरोपी के खिलाफ बयान दिया था। फ्रैंको मुलक्कल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर आरोप मुक्त करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था और उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया था।
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