
यरूशलम. कोरोना वायरस से पूरी दुनिया जूझ रही है। हालांकि, अमेरिका-ब्रिटेन में वैक्सीनेशन की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि, एक देश ऐसा भी है, जो कोरोना से जंग में आगे निकल गया है। हम बात कर रहे हैं, इजरायल की। इजरायल ने अमेरिका-यूरोप को भी पीछे छोड़ दिया। यहां अब तक 12% आबादी को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है। आईए जानते हैं कि इजरायल ने आखिर ये कैसे किया, जो सुपरपावर अमेरिका या यूरोप के अन्य देश नहीं कर पाए...
इजरायल में 20 दिसंबर को देशभर में टीकाकरण की शुरुआत की गई थी। यहां 10 दिन में लाखों लोोगं को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा चुकी है। यहां अब तक करीब 10 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन फाइजर दी गई है। यहां 60 साल से अधिक उम्र के 40% लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है।
वैक्सीनेशन में अमेरिका ब्रिटेन से आगे
2018 के आंकड़ों के मुताबिक, इजरायल की आबादी करीब 9 मिलियन यानी 90 लाख है। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां 12% आबादी को वैक्सीन लग चुकी है। वहीं, अमेरिका में सिर्फ 0.8% और ब्रिटेन में 1.4% आबादी को वैक्सीन लग पाई है। वहीं, भारत में कोरोना वैक्सीनेशन का ड्राई रन चल रहा है। जल्द ही टीकाकरण की तारीखों का ऐलान हो सकता है।
नेतन्याहू ने वैक्सीनेशन की शुरुआत की
इजरायल में वैक्सीनेशन की शुरुआत के दौरान सबसे पहले प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने टीका लगवाया था। नेतन्याहू ने जनवरी 2021 का टारगेट भी तय कर रखा है। यहां 31 जनवरी तक 22 लाख लोगों को वैक्सीन लग जाएगी।
इजरायल में कैसे दुनिया में सबसे तेज टीकाकरण हुआ
1- इजराइल भूगोलीय दृष्टि और जनसंख्या के मामले में छोटा देश है। इसका लाभ वैक्सीनेशन में भी देखने को मिला। यहां पहले से काफी अच्छी और डिजिटलकृत स्वास्थ्य प्रणाली है, इसे सफलता की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
2- मैनपावर ने भी इजरायल में सफल टीकाकरण में अहम भूमिका निभाई। यहां 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को सरकार से जुड़ीं बीमा कंपनियों में रजिस्टर्ड कराना पड़ता है। इसके अलावा मदद के लिए सेना के मेडिक्स डिपार्टमेंट को भी बुलाया गया है।
3- इजरायल में डिजिटिलाइजेशन, सामुदायिक आधारित स्वास्थ्य प्रणाली, कानून के तहत हर नागरिक को प्राथमिकता, देश के चार एचएमओ में से एक के साथ पंजीकृत होना, इस जंग से निकलने की वजह बनी।
4- सरकार ने सोशल मीडिया पर वैक्सीन के बारे में गलत जानकारी डालने वालों पर कार्रवाई की गई।
5- इसके अलावा लोगों को वैक्सीन के प्रति जागरूक करने के लिए ग्रीन पासपोर्ट जारी किए गए। इसके तहत लोगों को रेस्टोरेंट में फ्री खाना, फ्री यात्रा जैसी सुविधाएं मिलीं।
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