
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज बलात्कार-हत्या मामले में दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा मिली है। उसे मरने तक जेल में रहना होगा। संजय पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया है। कोर्ट ने इस मामले को रेयर ऑफ द रेयर नहीं माना, जिससे संजय को फांसी की सजा नहीं मिली। शनिवार को सीबीआई कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया था। संजय को अगस्त 2024 में 31 साल की ट्रेनी महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या मामले में सजा मिली है।
सजा सुनाने से पहले जज अनिर्बान दास ने सजय रॉय को अपनी बात कहने का मौका दिया। उन्होंने पीड़िता के परिजनों के वकील और सीबीआई के वकील की बातें सुनीं। दोनों वकीलों ने फांसी की सजा की मांग की। जज ने फैसला सुनाने का समय सोमवार दोपहर 2:45 रखा था। कोर्ट परिसर के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था है। कोर्ट से कुछ दूरी पर कुछ लोग विरोध प्रदर्शन किया।
1- संजय रॉय को कोलकाता के सियालदह कोर्ट द्वारा सजा सुनाई गई। कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 17 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। डॉक्टर के परिजनों ने मुआवजा लेने से इनकार कर दिया है।
2- संजय को जिन धाराओं के तहत दोषी करार दिया गया है उनमें कम से कम सजा 10 साल का कठोर कारावास है। इसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। अधिकतम सजा फांसी है।
3- सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को संजय रॉय को दोषी करार देते हुए कहा था, "मैंने सभी सबूतों और गवाहों की जांच की है, दलीलें भी सुनी हैं। इन सब पर गौर करने के बाद मैंने तुम्हें दोषी पाया है। तुम दोषी हो। तुम्हें सजा मिलनी ही चाहिए।"
4- सुनवाई के दौरान संजय रॉय ने खुद को निर्दोष बताया। कहा कि मुझे फंसाया जा रहा है। मैंने यह अपराध नहीं किया है। मुझे फंसाने वालों में एक आईपीएस अधिकारी भी शामिल है।
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5- डॉक्टर के माता-पिता ने संजय रॉय को फांसी देने की मांग की।
6- महिला डॉक्टर का शव 9 अगस्त 2024 को तड़के अस्पताल के सेमिनार हॉल में मिला था। हत्या से पहले उसे बेहद बर्बर तरीके से प्रताड़ित किया गया था। उसके साथ रेप किया गया था। इस मामले में पुलिस ने संजय रॉय को गिरफ्तार किया था।
7- कोलकाता पुलिस ने संजय रॉय की पहचान पीड़िता के शव के पास मिले ब्लूटूथ इयरफोन से की थी। सीसीटीवी फुटेज में संजय को गले में डिवाइस लटकाए सेमिनार हॉल में घुसते हुए देखा गया था।
8- इस घटना ने पूरे देश को आक्रोश से भर दिया था। हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था।
9- कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया था और इसे जांच के लिए सीबीआई को सौंपा था।
10- इस घटना के बाद आरजी कर कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष को इस्तीफा देना पड़ा था। मामले से निपटने के तरीके को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार की काफी आलोचना हुई थी।
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