
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बोनहुगली में लगाए गए ब्लड डोनेशन कैम्प में एक ट्रांसजेंडर को रक्तदान करने से रोका गया। ट्रांसजेंडर मानवता की भलाई के लिए अपने खून का दान करने आया था, लेकिन कैम्प में काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मी को उसका खून लेना मंजूर नहीं था। स्वास्थ्यकर्मी ने कहा कि ट्रांसजेंडर लोगों के खून में HIV (Human Immunodeficiency Virus) होने का डर अधिक रहता है। इसलिए वह खून नहीं ले सकता।
स्वास्थ्यकर्मी की बात सुन ट्रांसजेंडर को बुरा लगा। वह रक्तदान करने के लिए बहस करने लगा। कैम्प में आए दूसरे लोग भी स्वास्थ्यकर्मी के रवैये को देखकर हैरान थे। काफी देर तक बहस करने के बाद आखिरकर स्वास्थ्यकर्मी ट्रांसजेंडर का खून लेने को तैयार हुआ।
ट्रांसजेंडर को नहीं है रक्तदान की अनुमति
इस घटना से सवाल उठ रहे हैं कि ट्रांसजेंडर को रक्तदान करने से क्यों रोका जाता है। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स (APDR) के महासचिव रंजीत सूर ने कहा, "मैं इस प्रकार की घटना का समर्थन नहीं करता हूं। यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ने अपने दिशानिर्देश में कहा है कि ट्रांसजेंडर, गे, होमोसेक्सुअल या लेस्बियन को रक्तदान करने की अनुमति नहीं है। लेकिन इसके पीछे का कारण स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। यह अवैज्ञानिक है।"
रंजीत सूर ने कहा, "लोगों को इन दिशानिर्देशों की जानकारी नहीं है। रक्तदान एक सामाजिक कर्तव्य है। लिंग और पहचान के आधार पर किसी को रक्तदान करने से रोकना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। हम इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हैं।"
मेडिकल बैंक कोलकाता के सचिव डी आशीष ने बताया कि वे पूरे राज्य में रक्तदान शिविर आयोजित करते हैं। अक्सर देखा जाता है कि शिविर के अधिकारी एवं अन्य सदस्यों द्वारा ट्रांसजेंडर को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसके पीछे कुछ वजहें हैं, लेकिन गाइडलाइन ट्रांसजेंडर को रक्त दान देने की अनुमति देने के संबंध में बहुत साफ नहीं है।
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