
PM Modi Speech: पीएम नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के लोकसभा में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में अपना पक्ष रखा। उन्होंने लोकसभा में 2 घंटे 12 मिनट तक अपनी बात कही। विपक्ष पर जोरदार तरीके से निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस को मणिपुर या पूर्वोत्तर की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नौ साल से मेरी सरकार है और नार्थ-ईस्ट मेरे जिगर का टुकड़ा है।
कांग्रेस का हर काम राजनीति और चुनाव के आसपास
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस का हर काम राजनीति और चुनाव के आसपास ही रहती। जहां ज्यादा सीटें मिलती है वहां मजबूरन कुछ कर लेते हैं। लेकिन नार्थ-ईस्ट में उनकी कोशिश यही रही जहां इक्का-दुक्का सीटें रहीं, वह इलाके उनको मंजूर नहीं थे, उनके प्रति उनकी संवेदना नहीं। कांग्रेस ऐसे क्षेत्रों के साथ सौतेला व्यवहार करती जो कि उसके डीएनए में रहता है। लेकिन पिछले नौ साल से कह रहा कि नार्थ-ईस्ट मेरे जिगर का टुकड़ा।
मणिपुर में शांति स्थापना का हो रहा है प्रयास
पीएम मोदी ने कहा कि मणिपुर में शांति स्थापना के लिए प्रयास हो रहा है। राजनीति से इसको दूर रखेंगे तो जल्दी शांति होगी। हमारे लिए नार्थ-ईस्ट सबसे महत्वपूर्ण। मणिपुर हमारी ताकत बनने जा रहा है। नार्थ-ईस्ट के विकास को हमारी सरकार ने पहली प्राथमिकता दी है। पहली बार मणिपुर में रेल पहुंची। पहली बार नार्थ-ईस्ट में वंदे भारत पहुंचा। पहली बार सिक्किम में रेल पहुंचा। पहली बार मणिपुर में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी। उन्होंने कहा कि जब हम सबका साथ सबका विकास कहते हैं तो यह हमारे लिए नारा नहीं बल्कि कमिटमेंट है। उन्होंने कहा कि हम देश के विकास के लिए निकले लोग हैं, शरीर का कण-कण देश के लिए समर्पित है।
मणिपुर को लेकर पूछे कई सवाल, सत्ताधारी सांसदों ने दिया यह जवाब
पीएम मोदी ने कहा कि नार्थ ईस्ट की जिम्मेदार कांग्रेस है। इनकी राजनीति जिम्मेदार है। मणिपुर भारतीय संस्कारों से ओतप्रोत है। स्वतंत्रता संग्राम, आजाद हिंद फौज के लिए बलिदान देने वाला मणिपुर कांग्रेस के शासन में अलगाव की बलि चढ़ गया। मणिपुर में एक समय था हर व्यवस्था उग्रवादी संगठनों की मर्जी से चलती थी। उस समय कांग्रेस की सरकार थी। सरकारी दफ्तरों में महात्मा गांधी की फोटो नहीं लगाई जाती थी तो सरकार कांग्रेस की थी। उन्होंने कहा मोरांग में नेताजी की फोटो पर बम फेंका तब सरकार किसकी थी। इस पर सत्ताधारी सांसदों ने कांग्रेस का नाम लिया। लाइब्रेरी में रखी गई किताबों को जब जलाया गया तो सरकार किसकी थी, जब मंदिर में घंटी नहीं बजने दिया जाता था, इंफाल में मंदिर में बम फेंककर श्रद्धालुओं की जान ली गई तो सरकार किसकी थी? मणिपुर में आईएएस-आईपीएस अफसरों को वहां काम करने के लिए अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा उग्रवादी संगठनों को देना पड़ता था तो सरकार कांग्रेस की थी। कांग्रेस देश के लिए नहीं सोचती न ही देश की कठिनाईयों के लिए सोचती। इनको राजनीति के अलावा कुछ नहीं सूझता।
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