
पटना. देश के महान गणित वशिष्ठ नारायण सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद उनका पीएमसीएच में निधन हो गया। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। लेकिन इससे पहले जो तस्वीर सामने आई, उससे सभी सिहर उठे। दरअसल, आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती देने वाले महान गणितज्ञ के शव के लिए पटना के अस्पताल में एम्बुलेंस भी नहीं मिली।
महान गणितज्ञ की उपेक्षा के लिए कवि कुमार विश्वास ने बिहार सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट किया,
एम्बुलेंस देने से किया गया मना
डॉक्टरों ने जांच के बाद ब्रेन डेड बताया था। 74 साल के वशिष्ठ नारायण सिंह मूलरूप से भोजपुर जिले के बसंतपुर के रहने वाले थे। पटना में वे अपने छोटे भाई के घर पर रह रहे थे। परिजनों ने बताया कि श्री सिंह के परिजनों ने बताया कि पीएमसीएच ने एम्बुलेंस देने से मना कर दिया। उनका पार्थिव शरीर काफी देर तक ब्लड बैंक के पास रखना पड़ा। एम्बुलेंस वाले 5000 रुपए मांग रहे थे। उधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें महान विभूति बताया। उन्होंने कहा कि श्री सिंह ने बिहार का नाम रोशन किया।
देश के गिने चुने गणितज्ञों में थे सुमार
श्री सिंह देश के उन गिने-चुने गणितज्ञों में शुमार रहे हैं, जिन्होंने मैथ्स को एक नई परिभाषा दी। उनके बारे में कहा जाता है कि नासा द्वारा अपोलो की लॉन्चिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर्स कुछ समय के लिए बंद हो गए थे, तब कंप्यूटर ठीक होने पर वशिष्ठ नारायण और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक था। हालांकि इसके प्रमाण नहीं मिलते हैं।
सिजोप्रेनिया से थे पीड़िता
श्री सिंह करीब 40 साल से मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थे। वे लंबे समय से पटना के एक अपार्टमेंट में गुमनाम जिंदगी गुजार रहे थे। हालांकि मरने से पहले तक भी वे कॉपी-पेंसिल अपने साथ रखे रहे और कुछ न कुछ गणित लगाते रहे। श्री सिंह का लंबे समय से अस्पताल में इलाज चल रहा था। हाल में उन्हें छुट़्टी दी गई थी। लेकिन दुबारा तबीयत बिगड़ने पर गुरुवार को फिर से भर्ती कराया गया था। हालांकि जब उन्हें हॉस्पिटल लाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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