Labour Reform: अब 5 नहीं, सिर्फ 1 साल की नौकरी करने पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी-क्यों?

Published : Nov 22, 2025, 07:48 AM IST
 labour reform gratuity eligibility

सार

New Labour Reform Low: क्या सिर्फ एक साल में ग्रेच्युटी मिलना अब हकीकत है? सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए eligibility 5 साल से घटाकर 1 साल कर दी। वेज डेफिनिशन बढ़ाई गई, जिससे ग्रेच्युटी राशि भी बढ़ेगी। नए लेबर कोड 29 पुराने कानूनों को बदलते हैं। 

New labour laws 2025: भारत सरकार ने लेबर सेक्टर में ऐसा बड़ा बदलाव किया है, जिसे जानकर हर कर्मचारी के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि क्या अब सिर्फ एक साल की नौकरी में ग्रेच्युटी मिल जाएगी? तो इसका जवाब है, जी हां, अब यह सच है। सरकार ने ग्रेच्युटी की एलिजिबिलिटी को 5 साल से घटाकर सिर्फ 1 साल कर दिया है, और इससे लाखों फिक्स्ड-टर्म वर्कर्स को सीधा फायदा मिलेगा। यह फैसला 21 नवंबर से लागू किए गए चार नए लेबर कोड का हिस्सा है, जिसके जरिए 29 पुराने कानूनों को एक नई, आधुनिक प्रणाली में बदला गया है। इस बदलाव के साथ एक और बड़ा अपडेट आया-वेज की डेफिनिशन बढ़ा दी गई है, यानी अब ग्रेच्युटी की गणना एक बड़े बेस पर होगी। इसका सीधा मतलब है कि कर्मचारियों को पहले के मुकाबले ज्यादा ग्रेच्युटी मिलेगी।

क्या सिर्फ एक साल में ग्रेच्युटी मिलना सच में संभव है?

पहले ग्रेच्युटी लेने के लिए कर्मचारियों को लगातार पांच साल की नौकरी पूरी करनी होती थी। लेकिन अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी सिर्फ एक साल की लगातार सेवा के बाद ग्रेच्युटी के हकदार बन जाएंगे। सरकार का मानना है कि कई उद्योगों में फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट सामान्य हो चुके हैं। ऐसे में 5 साल की अनिवार्यता वाजिब नहीं थी। अब नए नियम आधुनिक जॉब पैटर्न के अनुसार तैयार किए गए हैं।

वेज की नई डेफिनिशन से आपकी ग्रेच्युटी कैसे बढ़ेगी?

नए नियम के तहत वेज में कई अतिरिक्त हिस्सों को शामिल किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब वेज कैलकुलेट करते समय ग्रेच्युटी कॉम्पोनेंट को भी गणना में शामिल किया जाएगा। इससे दो फायदे होंगे:

  • 1. ग्रेच्युटी का बेस अमाउंट बढ़ जाएगा
  • 2. कर्मचारियों को अधिक राशि मिलेगी

यह बदलाव मुख्य रूप से कर्मचारियों के हित में बताया जा रहा है।

क्या फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को अब स्थायी कर्मचारियों जैसा लाभ मिलेगा?

हां, बिल्कुल। एक्सपोर्ट सेक्टर समेत कई इंडस्ट्रीज़ में फिक्स्ड-टर्म वर्कर्स को अब ये लाभ मिलेंगे:

  • ग्रेच्युटी
  • प्रोविडेंट फंड (PF)
  • सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स

यानी अब नौकरी स्थायी न होती हुई भी सुरक्षा स्थायी होगी।

चार लेबर कोड लागू होने से क्या-क्या बदल गया?

21 नवंबर से लागू चार लेबर कोड हैं:

  • कोड ऑन वेजेज, 2019
  • इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड, 2020
  • कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020
  • ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020

इनके आने से:

  • सभी कर्मचारियों के लिए Appointment Letter अनिवार्य
  • Gig और Platform Workers को सोशल सिक्योरिटी कवर
  • 40+ उम्र वाले वर्कर्स के लिए फ्री हेल्थ चेकअप
  • महिलाओं को रात में काम करने की स्वतंत्रता, सुरक्षा शर्तों के साथ

सरकार का दावा है कि ये परिवर्तन भारत को एक लचीला, सुरक्षित और आधुनिक लेबर मार्केट देने में मदद करेंगे।

क्या यह रिफॉर्म भारत की वर्कफोर्स को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर ले जाएगा?

सरकार का कहना है कि ये कोड भारत के लेबर सिस्टम को कॉलोनियल कानूनों से मुक्त करके आधुनिक बनाएंगे। ग्लोबल पैटर्न के अनुसार तैयार यह स्ट्रक्चर वर्कर्स और कंपनियों दोनों के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है। यह रिफॉर्म उन लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें फिक्स्ड-टर्म, कॉन्ट्रैक्ट या प्रोजेक्ट बेस्ड नौकरी में ग्रेच्युटी की उम्मीद नहीं रहती थी। अब सिर्फ एक साल काम करने के बाद भी वह अपने अधिकार के पात्र होंगे।

ग्रेच्युटी की एलिजिबिलिटी एक साल क्यों की गई?

  • सरकार का कहना है कि फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों जैसा लाभ देना अब समय की मांग है।

वेज की नई डेफिनिशन से कर्मचारियों को कैसे मिलेगा फायदा?

  • अब ग्रेच्युटी कैलकुलेशन एक बढ़े हुए वेज बेस पर होगा, जिससे राशि बढ़ सकती है।

चार लेबर कोड लागू होने से क्या-क्या बदलेगा?

  • अपॉइंटमेंट लेटर अनिवार्य,  प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी (Gig & Platform Workers को Social Security) और 40+ कर्मचारियों को फ्री हेल्थ चेकअप शामिल हैं।

क्या नए नियम कंपनियों और कर्मचारियों दोनों के लिए बेहतर हैं?

  • सरकार कहती है कि यह मॉडल ग्लोबल स्टैंडडर्स (Global Standards) से मेल खाता है और वर्क फोर्स (workforce) को मॉर्डन (modern) व सिक्योर (secure) बनाता है।

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