
नई दिल्ली। लाल किला विस्फोट के मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी को लेकर जांच एजेंसियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पूछताछ में सामने आया कि वह न सिर्फ छात्रों को चुपचाप कट्टरपंथी बना रहा था, बल्कि ‘सॉफ्ट धर्मांतरण मॉडल’ का इस्तेमाल कर पहचान बदलकर माइंड-शेपिंग की कोशिश कर रहा था। इसी मॉडल के तहत इम्फाल की एक लड़की को ‘मरियम’ नाम देकर उसकी धार्मिक पहचान बदलने का प्रयास किया गया, जो उसके गुप्त नेटवर्क की गहराई का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।
जांच में सामने आया कि इम्फाल की एक लड़की लंबे समय से उमर से संपर्क में थी। पूछताछ के बाद उसने माना कि वह उसके ‘अनौपचारिक सत्रों’ में शामिल होती थी, क्योंकि वह एक सीनियर फैकल्टी सदस्य था। हालांकि, उसने कहा कि उसने कभी उसकी कट्टरपंथी विचारधारा स्वीकार नहीं की।
‘मरियम’ नाम देकर पहचान बदलने की कोशिश
एजेंसियों का कहना है कि लड़की को ‘मरियम’ नाम देकर सॉफ्ट कन्वर्ज़न की शुरुआत की गई—एक ऐसा तरीका जिसमें पहले व्यक्ति की धार्मिक पहचान बदली जाती है और फिर धीरे-धीरे विचारधारा को ढाला जाता है।
जांच में यह भी सामने आया कि उमर ने विश्वविद्यालय में शिक्षक होने का फायदा उठाया। वह छात्रों को ‘अनौपचारिक धार्मिक सत्रों’ में शामिल होने के लिए दबाव डालता था। कई छात्र बताते हैं कि वह अपने निर्देशों को मानने के लिए मानसिक दबाव बनाता था।
जांच के अनुसार उमर मानसिक विकार से पीड़ित था, जिसके कारण उसका व्यवहार अस्थिर रहता था। परिवार में भी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इतिहास पाया गया जो उसके आक्रामक, दोहरे व्यक्तित्व वाले व्यवहार को और गहरा बना रहा था।
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