
Pending cases in India: केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर कॉलेजियम सिस्टम पर नाखुशी जाहिर की है। देश के कोर्ट्स में लंबित केसों पर चिंता जताते हुए कानून मंत्री ने कहा कि यह जजों की नहीं बल्कि व्यवस्था की गलती है। सरकार इस मुद्दे को हल करने के लिए कदम उठा रही है। हम इस तरह की व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं जो देश में होनी चाहिए। सरकार अनावश्यक और अप्रचलित कानूनों को निरस्त कर रही है, अदालतों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के साथ टेक्नोलॉजी से कोर्ट्स को लैस किया जा रहा है।
जजों की भी हालत खराब है...
कानून मंत्री शनिवार को उदयपुर में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में भारत के विधि आयोग द्वारा आयोजित 'भारत में सतत विकास: विकास और कानूनी परिप्रेक्ष्य' पर एक सम्मेलन में बोल रहे थे। किरेन रिजिजू ने कहा कि देश में पेंडिंग केसों की संख्या 4.90 करोड़ को पार कर गई है। किसी भी देश या समाज में इतने सारे मामले लंबित होना अच्छी बात नहीं है। इसके कई कारण हैं... जजों की हालत भी खराब है। एक जज एक दिन में 50-60 केसों की सुनवाई करता है। कितने मामलों का निस्तारण करते हैं लेकिन जो संख्या रोज आती है वह दोगुनी है। रिजिजू ने कहा कि आम आदमी पूछता है कि लंबित मामलों की इतनी अधिक संख्या क्यों है लेकिन लोगों को यह पता नहीं है कि एक जज कितना काम करता है। यह जज की नहीं, सिस्टम की गलती है।
उन्होंने कहा कि पेंडेंसी को कम करने का एक बड़ा समाधान टेक्नोलॉजी है। कोर्ट्स को पेपरलेस बनाने के लिए देश भर में प्रौद्योगिकियों से लैस किया जा रहा है। हाईकोर्ट्स, लोअर कोर्ट्स, ट्रिब्यूनल्स को टेक्नोलॉजी से लैस किया जा रहा है। कानून मंत्री ने कहा, “ई-कोर्ट स्टेज-2 की सफलता के कारण ही कोविड महामारी के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई की गई।” उन्होंने कहा कि कई उच्च न्यायालयों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करने का अच्छा काम किया है। पेंडेंसी कम करने के कई तरीके हैं। सबसे बड़ी तकनीक है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को पेपरलेस बनाने का काम चल रहा है, जो पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सब कुछ डिजिटल होना है।
भारत ग्रीन एनर्जी का लीडर बन रहा
कानून मंत्री ने कहा कि भारत ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बन रहा है। दुनिया आज महसूस करती है कि पीएम नरेंद्र मोदी का विजन दुनिया के लिए सबसे उपयुक्त विजन है। जिस तरह से हम अपना जीवन जी रहे हैं, वह हमारे अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है। आर्थिक विकास हासिल करने की चाहत और हमारे आस-पास जो बेतरतीब चीजें हो रही हैं, वे डराने वाली हैं। पृथ्वी ग्रह के साथ न्याय करना हमारा नैतिक दायित्व और कर्तव्य है।
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