
लोकसभा चुनाव 2024 महाराष्ट्र। भारतीय चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव 2024 के तारीखों की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग के तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक 7 चरणों में चुनाव होंगे। ये चुनाव 19 अप्रैल को शुरू होंगे, जो 4 जून को काउंटिंग वाले दिन खत्म होंगे। लोकसभा चुनाव को लेकर देशभर में सरगर्मी भी बढ़ गई है। देश का हर राजनीतिक दल अपने-अपने तरफ से प्रचार प्रसार में जुटने की तैयारी में लग चुका है। हालांकि, देश में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ी पार्टियों पर आम जनता ने नजरें गड़ा रखी है। देश के मौजूदा सबसे बड़ी और बीते 2 बार से देश की सत्ता पर काबिज रहने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के बीच मुकाबले को लेकर उत्साहित है।
देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक महाराष्ट्र की बात करें तो यहां लोकसभा चुनाव के पहले ऐसे समीकरण बन गए हैं कि आगामी चुनाव में मुकाबला मजेदार होने के आसार दिख रहे हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटों के लिए शुरुआती 5 चरणों में चुनाव होने वाले हैं।
महाराष्ट्र में 5 चरणों में चुनाव
फेज 1: 19 अप्रैल, 5 सीट
फेज 2: 26 अप्रैल, 8 सीट
फेज 3: 7 मई, 11 सीट
फेज 4: 13 मई, 11 सीट
फेज 5: 20 मई,13 सीट
पहले फेज 19 अप्रैल को में इन सीटों पर होंगे चुनाव
रामटेक
नागपुर
भंडारा-गोंदिया
गढ़चिरौली-चिमूर
चंद्रपुर
दूसरे फेज 26 अप्रैल को इन सीटों पर होंगे चुनाव
बुलढाणा
अकोला
अमरावती
वर्धा
यवतमाला-वाशिम
हिंगोली
नांदेड़
परभणी
तीसरे फेज 7 मई को इन सीटों पर होंगे चुनाव
रायगढ़
उस्मानाबाद
बारामती
लातूर
माधा
सोलापुर
सांगली
सतारा
कोल्हापुर
रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग
हातकनांगल
चौथे फेज के लिए 13 मई को इन सीटों पर होंगे चुनाव
डिंडोरी
पालघर
नासिक
धुले
भिवंडी
कल्याण
ठाणे
मुंबई उत्तर
मुंबई दक्षिण-मध्य
मुंबई उत्तर-पूर्व
मुंबई उत्तर-पश्चिम
मुंबई दक्षिण
महाराष्ट्र की राजनीति में कैसे आए बदलाव
महाराष्ट्र जिसे 2014 के बाद से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए आसान जीत के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों के करीब आते ही अनिश्चित समय का सामना कर रहा है। राज्य में राजनीतिक अशांति देखने को मिल रही है और वोट पैटर्न एनडीए के लिए आगे एक कठिन लड़ाई साबित होने का संकेत दे रही है।
महाराष्ट्र भारतीय राजनीती में एक प्रमुख खिलाड़ी की हैसियत रखता है, जो भारत की लोकसभा में दूसरे सबसे अधिक संख्या में सांसद भेजता रहा है। इसी का परिणाम है कि पिछले चुनाव में इनमें से 41 सीटें एनडीए के खाते में गई थीं। लेकिन 2019 के बाद चीजों में नाटकीय मोड़ आया।
2019 के लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र में चेंज
2019 के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना अपने लंबे समय के सहयोगी, भारतीय जनता पार्टी से अलग हो गई, ठीक उसी तरह जैसे उनसे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने किया था। बाद में शिवसेना ही विभाजित हो गई। लंबे समय से चली आ रही बीजेपी-शिवसेना की साझेदारी खत्म हो गई और उद्धव ठाकरे के समूह ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र राजनीतिक स्थिति बदलने की कोशिश में लग गई।
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ वापस आ गया है। एनसीपी में भी इसी तरह का विभाजन देखा गया है, जिसमें अजित पवार एक महत्वपूर्ण गुट के साथ वर्तमान सरकार में शामिल हो गए हैं।
लोकसभा चुनाव 2019 में कैसा रहा प्रदर्शन
भाजपा और शिवसेना ने मिलकर 2019 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र की 48 सीटों में से 41 पर जीत हासिल की थी, जिसमें भाजपा को 23 सीटें और तत्कालीन शिवसेना को 18 सीटें मिलीं। इससे विपक्ष के लिए सिर्फ सात सीटें बचीं थी, जो इस बात पर प्रकाश डालती है कि महाराष्ट्र की राजनीति में संतुलन बराबर का नहीं है। वहीं कांग्रेस पार्टी की अगर बात की जाए तो जहां पार्टी को 2014 में दो सीटें मिली थी, वहीं साल 2019 के लोकसभा चुनाव में एक पर सिमट कर रह गईं।
उसकी सहयोगी राकांपा ने 2014 से अपनी चार सीटों पर कायम रही। 2019 के चुनावों में महाराष्ट्र के 48 निर्वाचन क्षेत्रों में से 21 में वोट शेयर 50 फीसदी से नीचे था। इस श्रेणी में भाजपा और शिवसेना के पास आठ निर्वाचन क्षेत्र थे, जबकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के पास तीन थे।दो अतिरिक्त सीटें अन्य पार्टियों को मिलीं।
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