Lok Sabha Elections 2024: बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक, भाजपा को मिल रहा परिवारवादी पार्टियों का साथ

Published : Mar 21, 2024, 10:32 AM ISTUpdated : Mar 21, 2024, 10:34 AM IST
Chirag Paswan Ajit Pawar Sita Soren

सार

लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को परिवारवादी पार्टियों से लाभ मिल रहा है। बिहार में चिराग पासवान से लेकर महाराष्ट्र में अजीत पवार तक, कई ऐसी पार्टियों के नेता एनडीए के साथ हैं। 

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अन्य नेता परिवारवाद का मुद्दा उठा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राजद नेता तेजस्वी यादव, जैसे नेताओं को परिवारवादी कहकर निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक भाजपा को दूसरी परिवारवादी पार्टियों का खूब साथ मिल रहा है।

बिहार में चिराग पासवान दे रहे भाजपा का साथ

बिहार में लोक जन शक्ति (रामविलास) पार्टी एनडीए का हिस्सा है। इसके नेता चिराग पासवान हैं। चिराग स्वर्गीय राम विलास पासवान के बेटे हैं। राम विलास पासवान ने लोक जन शक्ति पार्टी (लोजपा) नाम से पार्टी बनाई थी। उनके निधन के बाद लोजपा में टूट हुई। एक हिस्सा चिराग पासवान की लोक जन शक्ति (रामविलास) पार्टी है। दूसरा हिस्सा राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी है। इसके नेता पशुपति पारस हैं। पशुपति पारस रामविलास के भाई हैं।

शिबू सोरेन की बहू सीता सोरेन भाजपा में शामिल

मंगलवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) पार्टी के संस्थापक शिबू सोरेन की बहू सीता सोरेन भाजपा में शामिल हुईं। शिबू सोरेन परिवार में लंबे समय से तनाव चल रहा था। लोकसभा चुनाव से पहले सीता सोरेन के पाला बदला। खनन मामले में झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी हुई है। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन लोकसभा चुनाव में जेएमएम को लीड करने वाली हैं। कल्पना सोरेन के पक्ष में सहानुभूति लहर का सामना करने के लिए भाजपा ने सीता सोरेन को अपने पक्ष में किया है।

महाराष्ट्र में मिल रहा अजीत पवार का साथ

महाराष्ट्र में बड़े जनाधार वाली पार्टी NCP में पिछले साल टूट हुई थी। शरद पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी को उनके भतीजे अजीत पवार ने तोड़ दिया था। इसके चलते एनसीपी के दो हिस्से हुए। एक गुट अजीत पवार के साथ है। दूसरे गुट का नेतृत्व शरद पवार कर रहे हैं। अजीत पवार एनडीए में शामिल हैं। दूसरी ओर भाजपा ठाकरे परिवार के राज ठाकरे को भी एनडीए में आने की कोशिश कर रही है।

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हरियाणा में इनेलो विभाजन से बीजेपी को हुआ फायदा

2019 में परिवार-आधारित पार्टी इनेलो में टूट से भाजपा को लोकसभा चुनावों के साथ-साथ हरियाणा में सत्ता में आने में मदद मिली थी। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के उत्तराधिकारियों के बीच मतभेदों के बीच इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) में विभाजन हुआ। एक अलग समूह जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) बना। इससे जाट वोट बंट गए। इससे भाजपा को लोकसभा की सभी 10सीटें जीतने में मदद मिली। कुछ महीनों बाद जब भाजपा हरियाणा विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल करने से चूक गई तो उसने सरकार बनाने के लिए जेजेपी से हाथ मिलाया।

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