
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर सीट की बड़ी चर्चा है। इसकी मुख्य वजह मुख्तार अंसारी का नाम जुड़ा होना है। पिछले दिनों जेल में बंद मुख्तार अंसारी की मौत हुई थी।
गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में मुख्तार अंसारी का दबदबा हुआ करता था। इस बार के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी को टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने पारस नाथ राय को चुनावी मैदान में उतारा है।
कौन हैं पारस नाथ राय?
पहले गाजीपुर सीट से जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का नाम चल रहा था। उम्मीद जताई जा रही थी कि भाजपा उन्हें टिकट देगी। मनोज गाजीपुर के पूर्व सांसद हैं। हालांकि भाजपा ने मनोज सिन्हा के करीबी माने जाने वाले पारस नाथ को गाजीपुर का उम्मीदवार बना दिया। पारस आरएसएस से लंबे समय से जुड़े हैं। उनका घर गाजीपुर के मनिहारी ब्लॉक के सिखडी गांव में है। वह मदन मोहन मालवीय कॉलेज के संचालक हैं। पारस पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।
2019 के चुनाव में अफजाल अंसारी को मिली थी जीत
गाजीपुर में सातवें चरण में चुनाव होगा। यहां 1 जून को मतदान होने वाला है। 2019 के चुनाव में अफजाल अंसारी बसपा के टिकट से यहां से चुनाव लड़े थे। उन्हें जीत मिली थी। अफजाल ने भाजपा के मनोज सिन्हा को हराया था। अफजाल को 566082 वोट मिले थे। वहीं, मनोज सिन्हा को 446690 वोट मिले थे।
2014 में भाजपा के मनोज सिन्हा को मिली थी जीत
2014 के आम चुनाव में गाजीपुर सीट से भाजपा के मनोज सिन्हा को जीत मिली थी। उन्हें 306929 वोट मिले थे। सपा की प्रत्याशी शिवकन्या कुशवाह को 274477 और बसपा के कैलाश नाथ सिंह यादव को 241645 वोट मिले थे।
क्या है गाजीपुर का सियासी समीकरण?
गाजीपुर लोकसभा सीट के सियासी समीकरण पर नजर डालें तो यहां मुस्लिम वोट बैंक का जीत और हार पर बड़ा असर होता है। यहां कुशवाह और भूमिहारों की संख्या में अधिक है। इसके बाद बिंद, राजपूत, ब्राह्मण और वैश्य समाज के लोगों की संख्या है।
गाजीपुर में किसी जमाने में कांग्रेस की अच्छी पकड़ थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। यहां से भाजपा, सपा और बसपा तीनों दलों को जीत मिली है। 2024 के चुनाव में सपा और बसपा अलग-अलग लड़ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन है।
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