
नई दिल्ली। कश्मीर मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों नाम लिए बिना भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा था। इसके जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा था कि सरदार वल्लभभाई पटेल को जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में शामिल होने से परेशानी नहीं थी। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले में कांग्रेस पर पलटवार किया है।
किरेन रिजिजू ने छह ट्वीट कर कश्मीर मुद्दे के लिए जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक झूठ है कि महाराजा हरि सिंह ने कश्मीर के भारत में विलय के सवाल को टाल दिया था। कश्मीर मामले में नेहरू की संदिग्ध भूमिका की रक्षा के लिए यह झूठ लंबे समय से चला आ रहा है। शेख अब्दुल्ला के साथ समझौते के बाद नेहरू ने 24 जुलाई, 1952 को लोकसभा में कहा था कि आजादी से एक महीने पहले पहली बार महाराजा हरि सिंह ने भारत में कश्मीर के शामिल होने के लिए नेहरू से संपर्क किया था। नेहरू ने महाराजा हरि सिंह के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।
कश्मीर के भारत में शामिल करने को तैयार थे हरि सिंह
किरेन रिजिजू ने कहा कि महाराजा हरि सिंह तो कश्मीर के भारत में शामिल करने को तैयार थे, लेकिन खुद नेहरू ऐसा नहीं चाहते थे। उन्होंने कश्मीर को भारत में शामिल करने में देर की। महाराजा ने अन्य सभी रियासतों की तरह जुलाई 1947 में ही संपर्क किया था। अन्य राज्यों को स्वीकार किया गया, लेकिन कश्मीर को खारिज कर दिया गया था।
कानून मंत्री ने कहा कि नेहरू ने न केवल जुलाई 1947 में महाराजा हरि सिंह के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था, बल्कि नेहरू ने अक्टूबर 1947 में भी इसे खारिज कर दिया था। यह तब हुआ जब पाकिस्तानी आक्रमणकारी श्रीनगर के एक किलोमीटर के दायरे में पहुंच गए थे। नेहरू ने कश्मीर के लिए कुछ 'विशेष' मामला गढ़ा। वह केवल विलय के बजाय 'बहुत अधिक' चाहते थे। वे वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसा कर रहे थे।
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात में एक जनसभा के दौरान कहा था, "सरदार वल्लभभाई पटेल ने अन्य रियासतों के विलय से संबंधित मुद्दों को हल कर दिया था लेकिन "एक व्यक्ति" कश्मीर मुद्दे को नहीं सुलझा सका। मैं चूंकि सरदार साहब के नक्शे कदम पर चलता हूं। मुझमें सरदार पटेल की भूमि के मूल्य हैं। यही कारण है कि मैंने कश्मीर की समस्या का समाधान किया और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी।"
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